पीएमएलए के तहत गिरफ्तारी की शक्ति का इस्तेमाल अधिकारी की इच्छा के अनुसार नहीं किया जा सकता: न्यायालय
नेत्रपाल दिलीप
- 12 Jul 2024, 08:36 PM
- Updated: 08:36 PM
नयी दिल्ली, 12 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि धन शोधन रोधी कानून (पीएमएलए) के तहत गिरफ्तारी की शक्ति का इस्तेमाल ईडी अधिकारी की इच्छा और पसंद के अनुसार नहीं किया जा सकता।
कथित आबकारी नीति घोटाले से जुड़े धनशोधन मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को अंतरिम जमानत देने वाली न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के प्रति कोई भी अनुचित रियायत और छूट कानून के शासन तथा लोगों के जीवन एवं स्वतंत्रता के संवैधानिक मूल्यों के लिए हानिकारक होगी।
पीठ ने 64 पन्नों के फैसले में कहा, ‘‘किसी अधिकारी को गिरफ्तार किए जाने वाले व्यक्ति को फंसाने वाली सामग्री चुनिंदा रूप से चुनने की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्हें अपने दिमाग को ऐसी सामग्री पर भी लगाना चाहिए जो गिरफ्तार व्यक्ति को दोषमुक्त और निर्दोष सिद्ध करती हो। पीएमएलए की धारा 19(1) के तहत गिरफ्तारी की शक्ति का प्रयोग अधिकारी की इच्छा और पसंद के अनुसार नहीं किया जा सकता।’’
इसने कहा, ‘‘विश्वास करने के कारणों की वैधता की परख उसमें उल्लिखित और दर्ज की गई सामग्री तथा रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री के आधार पर की जानी चाहिए।’’
पीठ ने यह टिप्पणी इसलिए की, क्योंकि केजरीवाल ने दलील दी थी कि ईडी ने मामले में गवाहों द्वारा दिए गए दोषमुक्ति बयानों का ‘‘गिरफ्तारी के आधार’’ में उल्लेख नहीं किया है और केवल दोषसिद्धि वाले बयानों पर विचार किया है, जिसमें उनका नाम था।
शीर्ष अदालत ने कहा कि विजय मदनलाल चौधरी के 2022 के फैसले में स्वीकार किया गया एक दृष्टिकोण यह है कि पीएमएलए की धारा 19(1) के तहत गिरफ्तारी का आदेश उच्च रैंक वाले अधिकारी द्वारा लिया गया निर्णय है।
इस फैसले में पीएमएलए की वैधता को बरकरार रखा गया था।
शीर्ष अदालत ने कहा कि कानून का गलत प्रयोग या कर्तव्य का मनमाना प्रयोग प्रक्रिया में अवैधता की ओर ले जाता है और अदालत ऐसे फैसले को रद्द करने के लिए अपनी न्यायिक समीक्षा का इस्तेमाल कर सकती है।
इसने कहा, ‘‘यह न्यायिक अतिरेक या जांच में हस्तक्षेप नहीं होगा, जैसा कि प्रवर्तन निदेशालय द्वारा तर्क दिया गया है। अदालत केवल यह सुनिश्चित करती है कि कानून पर अमल विधान और संविधान के अनुसार हो।’’
भाषा
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