दिल्ली: महिला पत्रकारों ने कथित मारपीट के एक दिन बाद सीसीटीवी फुटेज व कानूनी कार्रवाई की मांग की
अविनाश
- 04 Sep 2026, 07:47 PM
- Updated: 07:47 PM
नयी दिल्ली, चार सितंबर (भाषा) दक्षिण दिल्ली के एक थाना में तीन सितंबर को कथित तौर पर मारपीट की शिकार हुईं दो महिला पत्रकारों ने शुक्रवार को घटना के सीसीटीवी फुटेज की मांग की और कहा कि वह मामले में उच्च न्यायालय का रुख करेंगी।
महिला पत्रकारों शाहीन खान और नफीसा खान ने अपने डिजिटल समाचार चैनल के संपादक संजय शर्मा के साथ यहां आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में यह मांग की।
संजय शर्मा ने कहा कि वह सात सितंबर को दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख करेंगे और फुटेज जारी करने तथा पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई का अनुरोध करेंगे।
पुलिस ने हालांकि, आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि दोनों महिलाओं ने कार्यक्रम स्थल के पास अपना स्कूटर खड़ा करके तय वीवीआईपी मार्ग में बाधा डाली थी और बार-बार कहने के बावजूद उन्होंने बात नहीं मानी।
शर्मा ने घटना की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों को 'गिरफ्तार किया जाना चाहिए और नौकरी से बर्खास्त किया जाना चाहिए'।
उन्होंने कहा, ''अगर थाने के प्रत्येक कमरे में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, तो उनकी तस्वीरें सार्वजनिक की जाए। उसमें जो कुछ भी दिखेगा, हम उसे स्वीकार कर लेंगे।''
पत्रकारों ने आरोप लगाया कि बृहस्पतिवार को उन्हें हिरासत में लेकर साकेत पुलिस थाना ले जाया गया, जहां उन्हें एक कमरे में ले जाकर पीटा गया। उन्होंने दावा किया कि वे दक्षिण दिल्ली में एक कार्यक्रम की कवरेज के लिए गए थे और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से सवाल पूछना चाहते थे।
उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने संवाददाताओं से उनकी धार्मिक पहचान के बारे में भी पूछा और जब उनकी पहचान मुस्लिम के तौर पर सामने आई, तो उनके साथ 'भेदभावपूर्ण व्यवहार' किया गया।
उन्होंने कहा, ''हमारी मांग है कि दिल्ली पुलिस द्वारा हमें गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लेने और हमारे फोन छीनने की जांच हो। हमारी प्राथमिकी भी दर्ज नहीं की गई हैं।''
शाहीन खान ने कहा, ''यह केवल दो पत्रकारों पर हमला नहीं है। यह उस आवाज पर हमला है जो सवाल पूछती है, जवाबदेही मांगती है और गलत के खिलाफ खड़ी होती है।''
नफीसा खान ने कहा कि उन्होंने किसी भी स्कूल, कॉलेज या दूसरे संस्थान में, जहां भी काम किया है, अपनी धार्मिक पहचान की वजह से कभी ऐसे बर्ताव का सामना नहीं किया था।
महिला पत्रकारों द्वारा लगाए गए आरोपों की हालांकि स्वतंत्र पुष्टि नहीं की जा सकी।
पुलिस ने कहा, ''वीवीआईपी मार्ग की सुरक्षा और प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए, दोनों महिलाओं को पूछताछ के लिए स्थानीय थाना ले जाया गया।''
पुलिस ने उन दावों को भी खारिज कर दिया कि मुख्यमंत्री से सवाल पूछने की कोशिश करने पर महिला पत्रकारों के साथ मारपीट की गई। पुलिस ने इन आरोपों को 'झूठा, गुमराह करने वाला और बेबुनियाद' बताया।
यह बयान पुलिस उपायुक्त (दक्षिण) अनंत मित्तल के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से साझा किया गया था। हालांकि, बाद में इस पोस्ट को सोशल मीडिया से हटा दिया गया।
इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो प्रसारित हुए थे जिनमें पत्रकारों के शरीर पर चोट के निशान दिखाई दे रहे थे।
इस बीच वेलफेयर पार्टी ऑफ इंडिया की महिला शाखा ने बयान जारी कर साकेत थाना में दो पत्रकारों के साथ कथित मारपीट, उन्हें हिरासत में लेने और धार्मिक आधार पर उनकी पहचान करने की कड़ी निंदा की।
पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव शीमा मोहसिन ने कहा, ''एक सार्वजनिक कार्यक्रम में सवाल पूछने के बाद, पेशेवर कर्तव्य का निर्वहन करने वाली पत्रकारों को निशाना बनाया गया, उनसे बदसलूकी की गई और उनके साथ मारपीट की गई।''
शर्मा ने उच्चतम न्यायालय से इस मामले का संज्ञान लेने की अपील की और कहा कि यह मुद्दा व्यक्तिगत स्वतंत्रता और काम करने की पत्रकारों की आजादी से जुड़ा है।
पत्रकारों ने कहा कि वे कानूनी कार्रवाई करेंगे और संबंधित पुलिसकर्मियों की जवाबदेही तय कराएंगे।
भाषा धीरज अविनाश
अविनाश
0409 1947 दिल्ली