विद्या भारती ने पेपर लीक को रोकने के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं के मौजूदा पैटर्न में बदलाव पर बल दिया
राजकुमार अविनाश
- 04 Jul 2024, 10:27 PM
- Updated: 10:27 PM
नयी दिल्ली, चार जुलाई (भाषा) मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी पेपर लीक विवाद की पृष्ठभूमि में बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध संगठन विद्या भारती ने ऐसी घटनाओं की पुनरावृति को रोकने तथा कोचिंग संस्थानों पर छात्रों की निर्भरता कम करने के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं के वर्तमान ‘पैटर्न’ में बदलावों पर बल दिया।
विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के अध्यक्ष डी रामकृष्णा राव ने यहां संवाददाता सम्मेलन में पूछे गये प्रश्नों का उत्तर देते हुए नीट-यूजी पेपर लीक पर ‘चिंता’ प्रकट की। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल अभ्यर्थियों की स्मरण शक्ति की ही नहीं, बल्कि उनकी ‘क्षमता, अभिरूचि, अभिवृत्ति एवं बुद्धि लब्धि (आईक्यू)’ का भी मूल्यांकन करने के लिए वर्तमान परीक्षा प्रणाली में बदलाव किया जाना चाहिए।
उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘इस तरह की परीक्षाओं के आयोजन में सुधार किया जाना चाहिए। हमारा परीक्षा पैटर्न भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान जैसे संस्थानों की तर्ज पर तुरंत बदला जाना चाहिए। आईआईटी की परीक्षा प्रणाली त्रुटिहीन है।’’
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) सरकारी एवं निजी (चिकित्सा शिक्षण) संस्थानों में एमबीबीएस, बीडीएस, आयुष और अन्य पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए राष्ट्रीय पात्रता एवं प्रवेश परीक्षा -स्नातक (नीट-यूजी) का आयोजन करती है।
राव ने सुझाव दिया कि मूल्यांकन पद्धतियों में भी बदलाव किया जाना चाहिए। उन्होंने अभ्यर्थियों की ‘क्षमता, अभिरूचि, अभिवृत्ति एवं बुद्धि लब्धि’ को परखने के लिए ‘‘खुली पुस्तक परीक्षा प्रणाली’’ शुरू करने की भी वकालत की।
उन्होंने कहा, ‘‘अभ्यर्थियों को पहले से ही 2000 प्रश्नों का प्रश्न बैंक उपलब्ध कराया जा सकता है, ताकि वे अपनी परीक्षा के दायरे को समझ सकें और खुद ही इसकी अच्छी तैयारी कर सकें।’’
उन्होंने कहा कि यदि एनटीए द्वारा अपनाए गए वर्तमान परीक्षा पैटर्न में बदलाव लाया जाता है, तो पेपर लीक की कोई घटना नहीं होगी और छात्रों की कोचिंग संस्थानों पर निर्भरता नहीं रहेगी।
वह शिक्षा के क्षेत्र में विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के योगदान को सामने लाने के लिए संगठन के वार्षिक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।
भाषा
राजकुमार