होटल में आग के दौरान बचाव अभियान में सहायता करने वाले गद्दा व्यापारी ने मुआवजे की मांग की
माधव
- 04 Jun 2026, 09:48 PM
- Updated: 09:48 PM
नयी दिल्ली, चार जून (भाषा) मालवीय नगर होटल में लगी आग में फंसे लोगों की मदद के लिए अपनी दुकान से सबकुछ निकाल लाने वाले स्थानीय गद्दा व्यापारी रियाजुद्दीन मंसूरी ने बचाव अभियान के दौरान हुए नुकसान के लिए सरकार से दो लाख रुपये के मुआवजे की मांग की है।
पड़ोसी द्वारा सूचना दिए जाने के बाद बचाव कार्य में शामिल हुए मंसूरी और उनके बेटे अरमान ने खिड़कियों से कूदने की कोशिश कर रहे लोगों को बचाने के लिए होटल के बाहर रजाई और गद्दे बिछा दिए।
अरमान ने बुधवार को कहा, ''ऊपरी मंजिलों पर रहने वाले लोग चिल्ला रहे थे और पूछ रहे थे कि क्या उन्हें कूद जाना चाहिए। मैंने तुरंत दुकान से लगभग 20 से 25 रजाई और गद्दे निकाले तथा उन्हें इमारत के बाहर बिछा दिया।''
मंसूरी ने पीटीआई-भाषा से कहा, ''हमने मानवीय आधार पर जो कुछ भी कर सकते थे, वह किया।''
उनके परिवार की गद्दे की दुकान 'फ्लोरिश स्टे बेड-एंड-ब्रेकफास्ट होटल' के सामने स्थित है।
उन्होंने कहा, ''हमें दो लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुआ। हमने सबकुछ लगा दिया... गद्दे, रजाई, चादरें और जो भी सामान उपलब्ध था। घायलों और यहां तक कि कुछ शवों को भी हमारी चादरों का इस्तेमाल करके बाहर निकाला गया।''
मंसूरी ने अपनी बंद दुकान की ओर देखते हुए कहा, ''मुझे नहीं पता कि दुकान कब खुलेगी।''
उनकी दुकान पास के होटल में लगी भीषण आग के बाद से बंद पड़ी है।
मंसूरी ने कहा, ''होटल मालिकों ने मुनाफा तो कमा लिया, लेकिन उनकी लापरवाही की वजह से हमें इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। सरकार को कम से कम उन लोगों को मुआवजा देना चाहिए जिन्होंने बचाव कार्य में आगे बढ़कर मदद की।''
उन्होंने कहा कि वह और उनके यहां काम करने वाले लोग घटनास्थल पर पहुंचने वाले पहले लोगों में से थे तथा दमकलकर्मियों के आने से पहले ही उन्होंने इमारत के बाहर गद्दे बिछा दिए थे।
मंसूरी ने कहा, ''लोगों के मदद के लिए चिल्लाने पर हमने तुरंत गद्दे बाहर बिछा दिए। लगभग आठ लोग उन पर कूद गए और बच गए।''
मंगलवार को मालवीय नगर के हौज रानी इलाके में स्थित फ्लोरिश स्टे होटल में लगी आग में 12 विदेशी नागरिकों सहित 21 लोगों की मौत हो गई और दर्जनों अन्य घायल हो गए।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि इमारत में तेजी से धुआं भर जाने पर कई लोगों ने खिड़कियों के शीशे तोड़ दिए और मदद के लिए चिल्लाने लगे।
भाषा नेत्रपाल माधव
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