पशु सुरक्षा संगठनों ने पिटबुल जैसी विदेशी नस्लों के कुत्तों पर प्रस्तावित प्रतिबंध का समर्थन किया
गोला नरेश
- 01 Jul 2024, 04:53 PM
- Updated: 04:53 PM
नयी दिल्ली, एक जुलाई (भाषा) देश में 21 पशु सुरक्षा संगठनों ने कुत्तों के बीच गैरकानूनी रूप से लड़ाई और हमलों के मामलों में वृद्धि के बीच पिटबुल और कुत्तों की ऐसी ही अन्य विदेश नस्लों पर केंद्र सरकार के प्रस्तावित प्रतिबंध का कड़ा समर्थन किया है।
सोमवार को जारी एक बयान में कहा गया है कि इन समूहों में ‘पीपुल फॉर एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनीमल्स’ (पेटा) इंडिया, फेडरेशन ऑफ इंडियन एनीमल प्रोटेक्शन ऑर्गेनाइजेशंस (एफआईएपीओ) तथा समायु जैसे नाम शामिल हैं।
मत्स्य, पशुपालन और डेयरी मंत्री ने दो मई को अपने 12 मार्च के परिपत्र पर जनता की टिप्पणियां मांगी थी। इस परिपत्र में सभी राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेश के मुख्य सचिवों को संबोधित किया गया था।
इस प्रस्ताव का उद्देश्य पालतू कुत्तों के हमलों के कारण लोगों की मौत की बढ़ती घटनाओं के बीच पिटबुल टेरियर, अमेरिकन बुलडॉग, रोटविलर और मास्टिफ्स समेत आक्रामक कुत्तों की 23 नस्लों की बिक्री और प्रजनन पर प्रतिबंध लगाना है।
पेटा इंडिया में ‘एडवोकेसी एसोसिएट’ शौर्य अग्रवाल ने बयान में कहा कि केंद्र सरकार के प्रस्ताव का उद्देश्य पिटबुल जैसी नस्लों को कुत्तों के बीच अवैध लड़ाई में शामिल करने से रोकना और कुत्तों के हमलों से नागरिकों की रक्षा करना है।
संगठन के एक अन्य सदस्य ने कहा कि पिटबुल और ऐसी ही अन्य नस्लों का सबसे ज्यादा दुरुपयोग किया जाता है, उन्हें अक्सर जंजीरों से बांधकर रखा जाता है जिससे उनका व्यवहार और ज्यादा आक्रामक हो जाता है। लड़ाई के दौरान चोटों से बचाने के लिए इनमें से कई कुत्तों को कान और पूंछ काटे जाने जैसी शारीरिक यातनाएं सहनी पड़ती है।
पशु अत्याचार रोकथाम अधिनियम, 1960 में कुत्तों को लड़ाई के लिए उकसाने को गैरकानूनी बनाने के बावजूद कुत्तों के बीच संगठित लड़ाई कराना भारत के कई हिस्सों में चलन में है।
पिटबुल को उनके इतिहास तथा प्रवृत्ति के कारण कई देशों में प्रतिबंधित किया गया है।
भारत में कुत्तों के जानलेवा हमले की घटनाएं आम हो गयी हैं।
हाल में बड़ौत में पिटबुल के हमले में प्रांतीय रक्षक दल की 45 वर्षीय महिला जवान गंभीर रूप से घायल हो गयी थी। चेन्नई में पांच वर्षीय लड़की पर रोटविलर ने हमला कर दिया था और गाजियाबाद, दिल्ली और लखनऊ में भी कुत्तों के हमलों की कई घटनाएं सामने आयी हैं।
भाषा
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