न्यायालय ने एस्सार पावर एमपी दिवाला विवाद में उप्र बिजली निकाय के दावों को खारिज किया
सुरेश
- 18 Mar 2026, 10:11 PM
- Updated: 10:11 PM
नयी दिल्ली, 18 मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश जल विद्युत निगम लिमिटेड (यूपीजेवीएनएल) द्वारा दायर उस अपील को खारिज कर दिया जिसमें एस्सार पावर एमपी लिमिटेड (अब महान एनर्जेन लिमिटेड) के दिवाला समाधान प्रक्रिया को चुनौती दी गई थी।
न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (एनसीएलटी) और राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय अधिकरण (एनसीएलएटी) के एक ही तरह के निष्कर्षों को बरकरार रखते हुए कहा कि पहले से लागू की जा चुकी समाशोधन योजना में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप उचित नहीं है।
यह कानूनी विवाद 2009 के एक समझौते से शुरू हुआ, जिसके तहत एस्सार पावर एमपी लिमिटेड (ईपीएमपीएल) को रिहंद जलस्त्रोत से पानी मिलना था।
मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच पानी के शुल्क को लेकर क्षेत्राधिकार संबंधी कई विवादों के बाद ईपीएमपीएल ने सितंबर 2020 में कॉरपोरेट दिवाला समाशोधन प्रक्रिया (सीआईआरपी) शुरू की।
इसके बाद, यूपीजेवीएनएल ने दिवालियापन से पहले के बकाया के लिए 12 करोड़ रुपये से अधिक के दावे प्रस्तुत किए।
हालांकि, समाधान पेशेवर (आरपी) ने इन्हें ''आकस्मिक दावे'' के रूप में वर्गीकृत किया और एक रुपये के नाममात्र मूल्य पर इन्हें स्वीकार कर लिया।
यूपीजेवीएनएल के दावों को खारिज करते हुए उच्चतम न्यायालय ने कहा कि स्वीकृत समाशोधन योजना के तहत परिचालन लेनदारों को स्वीकृत समाधान योजना के तहत ''शून्य भुगतान'' प्राप्त हुआ था। इस प्रक्रिया में गौतम अदाणी की अदाणी पावर लिमिटेड सफल बोलीदाता के रूप में उभरी थी।
न्यायालय ने कहा कि यदि यूपीजेवीएनएल के दावों को पूरी तरह से स्वीकार भी कर लिया जाए तो भी परिणाम अपरिवर्तित रहेगा।
पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि समाधान योजना लागू हो जाने के बाद दिवालियापन और दिवालिया संहिता (आईबीसी) का प्रावधान सभी हितधारकों पर बाध्यकारी होता है और निपटाए गए दावों को फिर से शुरू करना दिवाला प्रक्रिया को बाधित करेगा तथा लेनदारों के हितों को नुकसान पहुंचाएगा।
न्यायालय ने पाया कि यूपीजेवीएनएल द्वारा सीआईआरपी अवधि के दौरान बकाया राशि का भुगतान ईपीएमपीएल द्वारा विरोध के बावजूद पूरी तरह से कर दिया गया था।
भाषा
सुरभि सुरेश
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