गोवा विधानसभा के दर्शक दीर्घा में विरोध प्रदर्शन के मुद्दे पर जीएफपी विधायक ने माफी मांगी
दिलीप
- 10 Mar 2026, 06:28 PM
- Updated: 06:28 PM
पणजी, 10 मार्च (भाषा) गोवा फॉरवर्ड पार्टी (जीएफपी) के विधायक विजय सरदेसाई ने मंगलवार को राज्य विधानसभा में बिना शर्त माफी मांगी। उन्होंने यह माफी विधानसभा के दर्शक दीर्घा में कुछ लोगों द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन के कारण मांगी गई, क्योंकि विधानसभा में प्रवेश के लिए उन लोगों को पास सरदेसाई के कार्यालय द्वारा जारी किए गए थे।
विधानसभा के दर्शक दीर्घा में प्रदर्शन करने के मामले में चार लोगों को छह मार्च को गिरफ्तार किया गया था । इन लोगों ने कुशवती जिले के मीराबाग गांव में जुआरी नदी पर प्रस्तावित बांध के खिलाफ सदन के भीतर दर्शक दीर्घा में प्रदर्शन किया था।
आरोपियों ने सरदेसाई के कार्यालय द्वारा जारी पास का इस्तेमाल करके सदन में प्रवेश किया था, और विधानसभा अध्यक्ष गणेश गांवकर ने सोमवार को जीएफपी विधायक को बिना शर्त माफी मांगने के लिए 24 घंटे का समय दिया था।
सरदेसाई ने मंगलवार को विधानसभा में कहा कि वह विधानसभा अध्यक्ष का सम्मान करते हैं, जो लोकतांत्रिक सदन में आदर्श स्थिति है।
उन्होंने यह भी बताया कि वह 14 वर्षों से विधायक हैं और उन्होंने सरकार और विपक्ष दोनों में काम किया है।
विधायक ने कहा, "मैंने मंत्री और उपमुख्यमंत्री के रूप में भी कार्य किया है और इसलिए सदन की कार्यप्रणाली को समझता हूं।"
उन्होंने कहा कि विधायकों को पास जारी करने का अधिकार है, और उन्होंने भी ये पास जारी किए थे। हालाँकि, उन्होंने कहा कि जिन्हें ये पास मिले हैं, वे कैसा व्यवहार करते हैं, इस पर उनका नियंत्रण नहीं है।
जीएफपी नेता ने अध्यक्ष के आदेशानुसार बिना शर्त माफी मांगी और यह स्पष्ट किया कि उन्हें प्रदर्शनकारियों के व्यवहार या इरादों की कोई जानकारी नहीं थी।
उन्होंने कहा, "यदि मुझे उनके व्यवहार का पता होता, तो क्या मैं उन्हें पास देता। मैं किसी और को पास जारी करने के लिये कह सकता था।''
सरदेसाई ने यह भी बताया कि जहां विधायकों को पास जारी करने का अधिकार है, वहीं सदन में लोगों को प्रवेश देने का अंतिम अधिकार अध्यक्ष के पास होता है।
उन्होंने सदन को बताया कि यदि विधायकों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे उन लोगों के आचरण की जिम्मेदारी लें, जिन्हें पास जारी किए गए हैं, तो विधानसभा को इस मामले पर चर्चा करनी होगी और इसे लेकर कोई अलग नियम या कानून बनाना होगा।
भाषा रंजन दिलीप
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1003 1828 पणजी