ईवी चार्जिंग अवसंरचना दिशानिर्देश: न्यायालय ने केंद्र और उप्र को जारी किये नोटिस
सुरेश
- 24 Feb 2026, 08:48 PM
- Updated: 08:48 PM
नयी दिल्ली, 24 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने आवासीय सोसाइटी में 2024 के इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) चार्जिंग अवसंरचना स्थापित करने के संदर्भ में जारी दिशानिर्देशों को लागू कराने के लिए दाखिल जनहित याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करते हुए केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ सुनवाई की शुरुआत में उस समय नाराज हो गई, जब याचिकाकर्ता रचित कात्याल के वकील ने कहा कि इस मुद्दे पर याचिकाएं लंबित हैं और उनकी याचिका को भी उनके साथ सुनवाई के लिए स्वीकार किया जाना चाहिए।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ''हमें इस सूची में एक और याचिका क्यों जोड़ना चाहिए?'' उन्होंने उन कुछ जनहित याचिकाकर्ताओं का जिक्र किया, जो अखबारों में खबर पढ़कर शीर्ष अदालत का रुख करते हैं।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ''जनहित याचिका दायर करने वालों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है। ऐसा लगता है कि अब कुछ प्रमुख चेहरे ऐसे हैं जिनका एकमात्र एजेंडा सुबह अखबार पढ़ना और जनहित याचिका दायर करना है।''
पीठ ने, हालांकि बाद में कात्याल की जनहित याचिका स्वीकार कर ली और केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और कुशमैन एंड वेकफील्ड मैनेजमेंट सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के सचिव को नोटिस जारी किए। याचिका पर सुनवाई के लिए 13 अप्रैल की तारीख तय की गई।
पीठ ने आवासीय परिसरों में इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) मालिकों के समक्ष आने वाली बाधाओं पर संज्ञान लिया।
ग्रेटर नोएडा निवासी कात्याल का दावा है कि उनकी हाउसिंग सोसाइटी ने कथित तौर पर उनके लिए निर्धारित पार्किंग स्थान में निजी इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग प्वॉइंट स्थापित करने के उनके प्रयासों को बाधित कर दिया, जबकि उन्होंने सभी लागतों को वहन करने की पेशकश की थी।
याचिका में कहा गया है कि सोसाइटी में लगभग 4,000 फ्लैट और लगभग 56 इलेक्ट्रिक वाहन हैं, फिर भी केवल दो साझा चार्जिंग प्वॉइंट उपलब्ध हैं।
याचिकाकर्ता ने दलील दी है कि विद्युत मंत्रालय द्वारा जारी ईवी चार्जिंग अवसंरचना अवस्थापना और संचालन दिशानिर्देश 2024 में स्पष्ट रूप से निवासियों को निजी चार्जिंग यूनिट स्थापित करने की अनुमति दी गई है।
भाषा धीरज सुरेश
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