मोदी की इजराइल यात्रा से पहले घरेलू राजनीति में खींचतान
दिलीप
- 22 Feb 2026, 07:33 PM
- Updated: 07:33 PM
(हरिंदर मिश्रा)
यरूशलम, 22 फरवरी (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की संभावित इजराइल यात्रा से पहले घरेलू राजनीति में खींचतान तेज हो गई है, क्योंकि विपक्षी नेता याइर लापिद ने धमकी दी है कि अगर परंपरा के अनुसार उच्चतम न्यायालय के प्रमुख को आमंत्रित नहीं किया गया, तो वह संसद में मोदी के संबोधन का बहिष्कार करेंगे।
मोदी 25 फरवरी को दो दिवसीय यात्रा के लिए इजराइल पहुंच सकते हैं। इस दौरान उनका 'नेसेट' (इजराइली संसद) को संबोधित करने का कार्यक्रम है। मोदी इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग से भी मुलाकात करेंगे।
विपक्ष के नेता लापिद ने इस बात पर जोर दिया है कि मोदी के संसद को संबोधित करने के कार्यक्रम में उच्चतम न्यायालय के प्रमुख यित्जाक एमित को आमंत्रित किया जाए।
विपक्षी दल के सूत्रों का कहना है कि यह बहिष्कार का आह्वान नहीं है, बल्कि सरकार ''जानबूझकर हमें मुश्किल में डालने की कोशिश कर रही है।''
लापिद ने हाल में संसद को बताया, ''हमने भारतीय दूतावास से बात की... वे इससे घबराए हुए हैं। भारत के प्रधानमंत्री मोदी को अगले बुधवार को इजराइली संसद में आमंत्रित किया गया है, जो हम सभी के लिए सम्मान की बात है।''
लापिद ने सांसदों से कहा, ''अगर गठबंधन भारत के प्रधानमंत्री के साथ विशेष सत्र के दौरान उच्चतम न्यायालय के प्रमुख का बहिष्कार करता है, तो हम चर्चा में शामिल नहीं हो पाएंगे।''
विपक्षी नेता ने कहा, ''हम नहीं चाहते कि भारत को हमारी वजह से शर्मिंदगी उठानी पड़े, और ऐसा न हो कि एक अरब लोगों के देश के प्रधानमंत्री यहां आधी खाली संसद के सामने खड़े हों।''
इजराइल की घरेलू राजनीति न्यायिक सुधारों को लेकर तीखी बहस में उलझी हुई है।
जनवरी 2025 में यित्जाक के उच्चतम न्यायालय का अध्यक्ष चुने जाने के बाद, न्याय मंत्री यारिव लेविन ने प्रधान न्यायाधीश के रूप में उनके अधिकार को मान्यता देने से इनकार कर दिया है और उनसे मिलने या न्यायालय के प्रमुख के रूप में उन्हें संबोधित करने से भी मना कर दिया है।
देश के कानून के अनुसार, राजपत्र में भी प्रधान न्यायाधीश के रूप में उनका नाम प्रकाशित नहीं किया गया है।
भाषा
शफीक दिलीप
दिलीप
2202 1933 यरूशलम