भूटान की राजमाता को असम में 'सोल्जर ऑफ ह्यूमैनिटी' पुरस्कार से सम्मानित किया गया
दिलीप
- 03 Feb 2026, 07:36 PM
- Updated: 07:36 PM
कोकराझार (असम), तीन फरवरी (भाषा) भूटान की राजमाता दोरजी वांगमो वांगचुक को मंगलवार को असम के बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र (बीटीआर) के कोकराझार में 22वें उपेंद्र नाथ ब्रह्मा 'सोल्जर ऑफ ह्यूमैनिटी' पुरस्कार, 2025 से सम्मानित किया गया। एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई।
उन्हें उनकी उत्कृष्ट मानवीय सेवाओं और करुणामय नेतृत्व के लिए यह पुरस्कार प्रदान किया गया।
असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने कोकराझार स्थित बोडोलैंड विश्वविद्यालय के जे नीलेश्वर ब्रह्मा सभागार में आयोजित पुरस्कार समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि पूर्व राजा जिग्मे सिंग्ये वांगचुक की पहली पत्नी और राजमाता की उपस्थिति से कार्यक्रम का महत्व और बढ़ गया है। राज्यपाल ने कहा कि राज्य की जनता की ओर से उनका स्वागत करना एक सौभाग्य की बात है।
उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें यह पुरस्कार प्रदान करना उस व्यक्तित्व को एक 'उत्तम श्रद्धांजलि' है, जो मानवीय सेवा के अपने मिशन में अडिग रही है और मानव गरिमा के अधिकार के लिए लगातार संघर्ष करती रही है।
आचार्य ने कहा कि सामाजिक कल्याण, सांस्कृतिक संरक्षण, महिला सशक्तीकरण और करुणामय नेतृत्व में उनका योगदान 'सोल्जर ऑफ ह्यूमैनिटी' सम्मान की सच्ची भावना को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार भारत और भूटान के बीच गहरे, ऐतिहासिक और स्थायी संबंधों का भी प्रतीक है।
आचार्य ने उल्लेख किया कि 'सोल्जर ऑफ ह्यूमैनिटी' पुरस्कार 'बोडोफा' (बोडो लोगों के संरक्षक) उपेंद्र नाथ ब्रह्मा के आदर्शों और दर्शन को समर्पित है, जिनका जीवन त्याग, साहस और मानवता की सेवा में निहित था।
राज्यपाल ने समाज के प्रति बोडोफा के योगदान पर कहा कि गंभीर आर्थिक चुनौतियों के बावजूद, वे एक विशिष्ट नेता के रूप में उभरे और उन्होंने अपना जीवन सामाजिक न्याय, मानवाधिकार और समावेशी विकास के लिए समर्पित कर दिया।
गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी के गवर्नर और भूटान के पूर्व प्रधानमंत्री लोटे शेरिंग, असम के मंत्री यू जी ब्रह्मा, बोडोलैंड क्षेत्रीय परिषद के मुख्य कार्यकारी सदस्य हाग्रामा मोहिलारी, बीटीसी के पूर्व सीईएम प्रमोद बोरो और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
भाषा तान्या दिलीप
दिलीप
0302 1936 कोकराझार (असम)