विपक्ष बीड में मुकाबले को दो समुदायों के बीच की लड़ाई जैसा बनाने में जुटा है: पंकजा मुंडे
संतोष नेत्रपाल
- 11 May 2024, 06:11 PM
- Updated: 06:11 PM
(प्रशांत रंगनेकर)
बीड, 11 मई (भाषा) महाराष्ट्र की बीड लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की उम्मीदवार पंकजा मुंडे का दावा है कि विपक्षी दल इस निर्वाचन क्षेत्र के मुकाबले को दो समुदायों के बीच की लड़ाई जैसा बनाने का प्रयास कर रहे हैं।
बीड जिले में पिछले साल मराठा आरक्षण आंदोलन के दौरान हिंसा की कई घटनाएं देखी गई थीं, यहां तक कि प्रदर्शनकारियों ने राजनीतिक नेताओं खासकर सत्तारूढ़ भाजपा-शिवसेना-राकांपा (अजित गुट) गठबंधन के नेताओं के घरों को भी निशाना बनाया था।
पंकजा ने बृहस्पतिवार को एक साक्षात्कार में ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘यह गुस्सा व्यवस्था और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ था। उन्होंने माना कि यह बहुत आसान मुकाबला नहीं होगा।’’
पूर्व केंद्रीय मंत्री दिवंगत गोपीनाथ मुंडे की बेटी ने कहा कि उन्होंने (विपक्ष ने) इसे दो समुदायों के बीच की लड़ाई जैसा बना दिया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास यही एकमात्र मुद्दा है जिसे वे उठा सकते हैं, इसलिए वे इसे चतुराई से उठा रहे हैं।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शायद कठिन मुकाबले को भांपकर इस बार पंकजा मुंडे को उनकी छोटी बहन और दो बार की मौजूदा सांसद प्रीतम मुंडे की जगह टिकट दिया।
अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के प्रमुख नेता रहे अपने पिता की तरह पंकजा खुद को राज्य में समुदाय के नेता के रूप में पेश करना चाहती हैं। हालांकि, ऐसी छवि आरक्षण आंदोलन की पृष्ठभूमि में बीड में उनके लिए चीजों को मुश्किल बना देती है।
बीड में 13 मई को होने वाले चुनाव में पंकजा के मुख्य प्रतिद्वंद्वी राकांपा (शरद गुट) के बजरंग सोनवणे हैं जो मराठा समुदाय से हैं।
पंकजा ने कहा, ‘‘हर चुनाव अपने आप में कठिन होता है। इस बार स्थिति थोड़ी गंभीर है और अगर मैं इससे इनकार करती हूं, तो यह व्यावहारिक नहीं होगा।’’
उन्होंने आरक्षण मुद्दे की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘‘कुछ मुद्दे जो बहुत संवेदनशील हैं, उन्हें संवेदनशीलता से निपटाया जाना चाहिए। मैं ऐसा कर रही हूं और मुझे लगता है कि हम अंत में सफल होंगे।’’
राजनीतिक रूप से प्रभावशाली मराठा समुदाय की कोटा की मांग ने राज्य की राजनीति में एक दरार डाल दी है क्योंकि ओबीसी नेता मराठा समुदाय के नेता मनोज जरांगे के इस रुख का कड़ा विरोध कर रहे हैं कि उनके समुदाय को ओबीसी श्रेणी में शामिल किया जाए।
भाषा संतोष