अदालत ‘पॉडकास्टर’ राज शमानी के व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा के लिए रोक लगाने का आदेश देगी
वैभव नेत्रपाल
- 17 Nov 2025, 08:15 PM
- Updated: 08:15 PM
नयी दिल्ली, 17 नवंबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को कहा कि वह ‘पॉडकास्टर’ और उद्यमी राज शमानी के व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा के लिए रोक लगाने का आदेश देगा।
उच्च न्यायालय शमानी की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें उनकी सहमति के बिना उनकी छवि, व्यक्तित्व और आवाज के अनधिकृत उपयोग पर रोक लगाने और एआई-जनित सामग्री पर रोक लगाने का आदेश देने का अनुरोध किया गया था।
न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा ने कहा कि अदालत एक विस्तृत आदेश पारित करेगी और पॉडकास्टर के मुकदमे पर मेटा के मंचों, गूगल, एक्स कॉर्प, टेलीग्राम और यूट्यूब को समन जारी करेगी।
अदालत ने कहा, ‘‘हम रोक लगाने का आदेश जारी करेंगे।’’
सुनवाई के दौरान शमानी के वकील ने तर्क दिया कि एआई-जनित डीपफेक और फर्जी विज्ञापन ऑनलाइन प्रसारित किए जा रहे हैं, अनधिकृत चैटबॉट और टेलीग्राम चैनल उनका प्रतिरूपण कर रहे हैं, सलाह दे रहे हैं, धन जुटा रहे हैं, क्रिप्टो योजनाओं का प्रचार कर रहे हैं और किताबों का विपणन कर रहे हैं जैसे कि शमानी व्यक्तिगत रूप से इसमें शामिल हों।
अदालत को बताया गया कि शमानी एक प्रमुख ‘पॉडकास्टर’ हैं और ‘फिगरिंग आउट’ नामक एक ‘पॉडकास्ट शो’ चलाते हैं, जिसमें वह मशहूर हस्तियों से बात करते हैं।
वकील ने कहा कि यूट्यूब चैनल शमानी के ‘पॉडकास्ट’ की ‘क्लिप’ और ‘स्क्रिप्ट’ का इस्तेमाल उनकी अनुमति और सहमति के बिना कर रहे हैं, और हैशटैग और मीम्स का इस्तेमाल दृश्यता बढ़ाने के लिए किया जा रहा है।
हैशटैग के मुद्दे पर अदालत ने कहा कि वह इस समय राहत देने पर विचार नहीं कर सकती क्योंकि इनका इस्तेमाल न केवल नकल करने वालों द्वारा, बल्कि प्रशंसकों द्वारा भी किया जा सकता है।
अदालत ने कहा कि अगर वह एक व्यापक आदेश देती है, तो यह पूरे मंच पर लागू होगा। उसने वादी के वकील से अगली सुनवाई में इस मुद्दे को उठाने को कहा।
इसने कहा कि वह ‘पैरोडी’ या ‘व्यंग्यात्मक वीडियो’ के खिलाफ कोई आदेश नहीं दे रही है।
प्रचार का अधिकार (जिसे आमतौर पर व्यक्तित्व अधिकार के रूप में जाना जाता है) एक ऐसा अधिकार है जो किसी व्यक्ति को खुद की छवि, नाम या सादृश्यता की रक्षा, नियंत्रण और उससे लाभ कमाने का हक प्रदान करता है।
भाषा संतोष वैभव
वैभव