न्यायालय ने मेकेदातु जलाशय परियोजना के निर्माण के खिलाफ तमिलनाडु सरकार की याचिका खारिज की
देवेंद्र नरेश
- 13 Nov 2025, 03:41 PM
- Updated: 03:41 PM
नयी दिल्ली, 13 नवंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने कर्नाटक द्वारा कावेरी नदी पर मेकेदातु जलाशय परियोजना के निर्माण के खिलाफ तमिलनाडु सरकार की याचिका को खारिज कर दिया और इसे ‘‘समय से पूर्व दायर की गई अर्जी’’ बताया।
भारत के प्रधान न्यायाधीश बी.आर. गवई, न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ ने कहा कि राज्य की आपत्तियों के साथ-साथ विशेषज्ञ निकायों, कावेरी जल विनियमन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) और कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) की राय पर विचार करने के बाद ही योजना को मंजूरी दी जायेगी।
पीठ ने कहा, ‘‘इस स्तर पर, सीडब्ल्यूसी द्वारा पारित आदेश के तहत केवल डीपीआर तैयार करने की अनुमति दी जा रही है, वह भी तमिलनाडु राज्य, सीडब्ल्यूएमए और सीडब्ल्यूआरसी के विशेषज्ञों की आपत्तियों को ध्यान में रखने के बाद।’’
इसने कहा, ‘‘यह भी ध्यान देने योग्य बात है कि सीडब्ल्यूसी ने यह भी निर्देश दिया था कि डीपीआर पर विचार करने के लिए सीडब्ल्यूएमए और सीडब्ल्यूआरसी का पूर्व अनुमोदन एक पूर्व शर्त होगी। इस मामले को देखते हुए, हम पाते हैं कि वर्तमान आवेदन समय से पहले ही दायर किया जा रहा है।’’
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि सीडब्ल्यूसी द्वारा अंतिम निर्णय डीपीआर की तैयारी और सीडब्ल्यूएमए तथा सीडब्ल्यूआरसी की राय के बाद ही लिया जायेगा।
उच्चतम न्यायालय ने उल्लेख किया कि इससे पहले अगस्त 2023 में तीन न्यायाधीशों की पीठ ने 2023 के मानसून के संबंध में उठे मुद्दे पर विचार करने से इनकार कर दिया था और सीडब्ल्यूएमए से स्थिति का आकलन करने को कहा था और कहा था कि न्यायालय के पास विशेषज्ञता नहीं है।
पीठ ने कहा, ‘‘हम 25 अगस्त, 2023 के अपने आदेश में कही गई बात को दोहराते हैं कि हमारे पास विशेषज्ञता नहीं है। उच्चतम न्यायालय ने कई बार यह दोहराया है कि जिन मामलों में विशेषज्ञों की राय आवश्यक है, उनमें अदालत को हस्तक्षेप करने से बचना चाहिए।’’
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि कर्नाटक न्यायालय के निर्देशों के अनुसार पानी छोड़ने के लिए बाध्य है और कहा, ‘‘यदि कर्नाटक इस न्यायालय के निर्देशों का पालन करने में विफल रहता है, तो उसे न्यायालय की अवमानना करने के मामले का सामना करना पड़ेगा।’’
भाषा देवेंद्र