एआरवी-थेरेपी दवाओं की आपूर्ति, गुणवत्ता से संबंधित याचिका पर न्यायालय तीन दिसंबर को करेगा सुनवाई
शोभना दिलीप
- 11 Nov 2025, 08:43 PM
- Updated: 08:43 PM
नयी दिल्ली, 11 नवंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि वह तीन दिसंबर को उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें देश में एचआईवी मरीजों के इलाज के लिए एंटी-रेट्रोवायरल (एआरवी) थेरेपी दवाओं की आपूर्ति और गुणवत्ता पर चिंता जताई गई है।
एआरवी थेरेपी में एचआईवी से संक्रमित लोगों का एचआईवी-रोधी दवाओं से इलाज किया जाता है।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ को बताया गया कि 16 राज्यों ने पिछले साल सितंबर में इस मामले में याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर हलफनामे पर अपने जवाब दाखिल नहीं किए हैं।
पीठ ने कहा, ‘‘इस बीच, अगर ये 16 राज्य चाहें तो अपना जवाब दाखिल कर सकते हैं।’’
अदालत 2022 में एनजीओ ‘नेटवर्क ऑफ पीपल लिविंग विद एचआईवी/एड्स’ और अन्य द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर ने कहा कि याचिका में एचआईवी रोगियों के इलाज के लिए दवाओं की गुणवत्ता से संबंधित एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया गया है।
जब उन्होंने कहा कि 16 राज्यों ने अभी तक अपने हलफनामे दाखिल नहीं किए हैं, तो पीठ ने पूछा, ‘‘ अगर राज्य हलफनामे दाखिल नहीं कर रहे हैं, तो हम मामले को कब तक लंबित रख सकते हैं?’’
केंद्र और कुछ राज्यों के वकील ने कहा कि उन्होंने पहले ही अपने हलफनामे दाखिल कर दिए हैं।
फरवरी में न्यायालय ने राज्यों से एक महीने के भीतर एआरवी-थेरेपी दवाओं की गुणवत्ता पर अपना जवाब दाखिल करने को कहा था।
याचिकाकर्ताओं के वकील ने तब कहा था कि केवल चार राज्यों ने ही हलफनामे दाखिल करके अपने जवाब पेश किए हैं, जिसमें खरीद प्रक्रिया और दवाओं की गुणवत्ता सहित कुछ मुद्दों पर प्रकाश डाला गया है।
केंद्र ने पिछले वर्ष जुलाई में उच्चतम न्यायालय को बताया था कि वह राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत एआरवी-थेरेपी केंद्रों के माध्यम से एचआईवी से पीड़ित सभी लोगों के लिए मुफ्त, आजीवन एआरवी दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित कर रहा है।
याचिकाकर्ताओं के वकील ने पहले कहा था कि याचिका दायर करने के बाद से हुए घटनाक्रमों को देखते हुए, वर्तमान में दवाओं की कोई कमी नहीं है लेकिन उन्होंने दवाओं की खरीद और गुणवत्ता के बारे में मुद्दे उठाए थे।
भाषा शोभना