हर प्राकृतिक आपदा के लिए जलवायु परिवर्तन को दोष देना गलत है : लेखक स्टीफन ऑल्टर
प्रशांत दिलीप
- 04 Nov 2025, 08:39 PM
- Updated: 08:39 PM
नैनीताल, चार नवंबर (भाषा) हर आपदा के लिए जलवायु परिवर्तन को जिम्मेदार ठहराने तथा अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए इसका इस्तेमाल करने के प्रति आगाह करते हुए प्रख्यात लेखक स्टीफन ऑल्टर ने कहा कि उनका मानना है कि जलवायु परिवर्तन हमारे समय के सबसे गंभीर मुद्दों में से एक है।
पर्यावरण संरक्षक ने हाल ही में संपन्न “हिमालय की गूंज: कुमाऊं साहित्य एवं कला महोत्सव” के 10वें संस्करण में अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन शब्द का प्रयोग इतनी बार - और अक्सर गलत तरीके से - किया गया है कि यह पुराने मुहावरे ‘ईश्वरीय कृत्य’ जैसा लगने लगा है, जिसका अब कोई मतलब नहीं रह गया है।
ऑल्टर (69) ने कहा, “जलवायु परिवर्तन पर चर्चा से मुझे जो समस्या होती है, उनमें से एक यह है कि हर चीज जलवायु परिवर्तन बन जाती है। हर चीज का दोष जलवायु परिवर्तन पर मढ़ा जाता है। हम यह भी कह सकते हैं कि ‘पहाड़ की गूंज’ पर बादल छा गए हैं, तो यह जलवायु परिवर्तन ही होगा।”
ऑल्टर ने कहा, “इसका प्रयोग इतनी बार और इतनी गलत तरीके से किया जाता है कि हम हर चीज के लिए इसे दोषी ठहराते हैं और फिर कहते हैं, ‘ठीक है, यह हमारी समस्या नहीं है’।” उन्हें प्राकृतिक दुनिया के अन्य प्रभावशाली कार्यों के साथ-साथ हिमालयी लेखन को भी सामने लाने के लिये ‘हिमालयन इकोज़’ के प्रथम ‘नेचर राइटिंग प्राइज’ से सम्मानित किया गया।
उन्होंने इस वर्ष के शुरू में उत्तराखंड के धराली गांव और राजधानी देहरादून में हुई हिमालयी आपदाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि केवल जलवायु के कारण नहीं बल्कि खराब योजना और अनियमित विकास के कारण क्षति बढ़ी है।
उन्होंने कहा, “यह हमारी कमजोर योजना है, जलमार्गों, घाटी और हमारे आस-पास हुए कुछ विकास कार्यों की मूर्खता ही असल में इन समस्याओं का कारण है। धराली में पुराने घर अब भी खड़े हैं - नए घर बह गए।”
पर्यावरण, यात्रा और भारत की प्राकृतिक संपदा जैसे विषयों पर 20 से अधिक पुस्तकें लिख चुके ऑल्टर ने इस बात पर जोर दिया कि विज्ञान स्वयं कहानी कहने का एक ऐसा रूप है, जो लोगों को आकर्षित और प्रेरित कर सकता है। इनमें से कुछ काल्पनिक और कुछ गैर-काल्पनिक हैं।
दो दिवसीय महोत्सव रविवार को संपन्न हो गया।
भाषा प्रशांत