चीन-तिब्बत मुद्दे का समाधान दोनों पक्षों के लिए लाभकारी होगा: केंद्रीय तिब्बती प्रशासन
खारी नेत्रपाल
- 29 Apr 2024, 09:22 PM
- Updated: 09:22 PM
नयी दिल्ली, 29 अप्रैल (भाषा) केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (सीटीए) ने चीन के साथ दशकों से जारी ‘तिब्बत संघर्ष’ का समाधान बातचीत के माध्यम से निकालने का अपना आह्वान दोहराया है।
पिछले सप्ताह, सिक्योंग या तिब्बत की निर्वासित सरकार (सीटीए) के राजनीतिक प्रमुख पेन्पा त्सेरिंग ने कहा था कि प्रशासन ने तिब्बत मुद्दे का समाधान खोजने के तरीके तलाशने के लिए बीजिंग के साथ पर्दे के पीछे बातचीत शुरू की है।
त्सेरिंग ने उसी समय यह भी कहा था कि अनौपचारिक वार्ता से तत्काल प्रगति की उम्मीद नहीं है।
तिब्बत में चीन विरोधी प्रदर्शनों और बौद्ध क्षेत्र के प्रति बीजिंग के कट्टरपंथी दृष्टिकोण के मद्देनजर दोनों पक्षों के बीच औपचारिक वार्ता करीब एक दशक से नहीं हो रही है, लेकिन इन टिप्पणियों को दोनों पक्षों के फिर से जुड़ने की इच्छा के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
त्सेरिंग के बयान के बाद चीन ने शुक्रवार को कहा कि वह केवल दलाई लामा के प्रतिनिधियों से बात करेगा, न कि भारत में निर्वासित तिब्बती सरकार के अधिकारियों से।
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने तिब्बत के दलाई लामा की स्वायत्तता की लंबे समय से जारी मांग पर बातचीत से भी इनकार कर दिया।
चीन की प्रतिक्रिया के बाद, सीटीए के प्रवक्ता तेनजिन लेक्षे ने कहा कि केंद्रीय तिब्बती प्रशासन की समाधान खोजने की नीति चीन के संविधान के ढांचे के भीतर तिब्बती लोगों के लिए वास्तविक स्वायत्तता की तलाश करना है और लंबे समय से लंबित मामले का समाधान दोनों पक्षों के लिए लाभकारी होगा।
तिब्बत की निर्वासित सरकार हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में है और लगभग 30 देशों में रहने वाले एक लाख से अधिक तिब्बतियों का प्रतिनिधित्व करती है।
तिब्बतियों के आध्यात्मिक नेता दलाई लामा के प्रतिनिधियों और चीन सरकार के बीच वर्ष 2002 से 2010 के बीच नौ दौर की बातचीत हुई लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। तब से कोई औपचारिक बातचीत नहीं हुई है।
तिब्बती पक्ष ने इस दौरान चीन के साथ अपनी बातचीत में दलाई लामा की समाधान खोजने की नीति के अनुरूप तिब्बत के लोगों के लिए वास्तविक स्वायत्तता की वकालत की। दलाई लामा तिब्बत के मुद्दे को बातचीत के जरिए सुलझाने के पक्षधर रहे हैं।
भाषा
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