अदालत ने बहरामपुर में झड़पों के कारण लोकसभा चुनाव स्थगित करने की सिफारिश का प्रस्ताव रखा
शफीक रंजन
- 23 Apr 2024, 09:00 PM
- Updated: 09:00 PM
कोलकाता, 23 अप्रैल (भाषा) कलकत्ता उच्च न्यायालय ने हाल में रामनवमी समारोह के दौरान पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में दो समुदायों के बीच झड़पों पर नाखुशी व्यक्त करते हुए मंगलवार को निर्वाचन आयोग को बहरामपुर में लोकसभा चुनाव स्थगित करने की सिफारिश करने का प्रस्ताव दिया।
अदालत मुर्शिदाबाद के बहरामपुर लोकसभा क्षेत्र में 13 और 17 अप्रैल को हुई झड़पों की जांच सीबीआई और एनआईए से कराने के अनुरोध वाली दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।
उच्च न्यायालय ने कहा कि यदि आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) लागू होने पर दो समूह लड़ रहे हैं, तो उन्हें किसी निर्वाचित प्रतिनिधि की आवश्यकता नहीं है और ऐसे में ‘‘चुनाव एक और समस्या पैदा करेगा।’’
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश टी.एस. शिवगणनम की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने ‘‘निर्वाचन आयोग को एक सिफारिश करने का प्रस्ताव दिया कि जब लोग आठ घंटे तक शांति से किसी अवसर का जश्न नहीं मना सकते, तो वे संसद में अपने प्रतिनिधियों को चुनने के हकदार नहीं होंगे इसलिए बहरामपुर निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव टाल दिया जाए।’’
मुर्शिदाबाद की घटना पर नाखुशी जताते हुए पीठ ने कहा, ‘‘यदि लोग शांति और सद्भाव के साथ नहीं रह सकते हैं, तो हम चुनाव रद्द कर देंगे, हम कहेंगे कि निर्वाचन आयोग इस जिले में संसदीय चुनाव नहीं कराए।’’
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि खबरों के अनुसार, कोलकाता में रामनवमी पर लगभग 33 कार्यक्रम आयोजित किए गए, लेकिन कोई अप्रिय घटना नहीं हुई।
यह देखते हुए कि दोनों याचिकाकर्ता इस बात पर सहमत हैं कि पहले रामनवमी पर मुर्शिदाबाद में उन जगहों पर ऐसी कोई घटना नहीं हुई थी, अदालत ने पूछा कि क्या इसमें बाहरी लोग शामिल थे।
विश्व हिंदू परिषद के कोलकाता क्षेत्र के संयोजक अमिय सरकार और मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के पश्चिम बंगाल और सिक्किम के क्षेत्रीय संयोजक एस.ए.अफजल ने जनहित याचिकाएं दायर की हैं।
खंडपीठ ने अपने आदेश में पश्चिम बंगाल सरकार को अगली सुनवाई की तारीख पर एक हलफनामे के रूप में एक रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।
अदालत ने राज्य और केंद्रीय जांच एजेंसियों को छूट दी कि अगर वे चाहें तो अपना हलफनामा दाखिल कर सकते हैं।
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 26 अप्रैल तय की।
भाषा शफीक