सपा की दृष्टि और दृष्टिकोण केवल परिवार की उन्नति और प्रगति तक ही सीमित : ब्रजेश पाठक
राजकुमार
- 10 Apr 2024, 10:18 PM
- Updated: 10:18 PM
लखनऊ, 10 अप्रैल (भाषा) समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा जारी किये गये घोषणापत्र पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने बुधवार को कहा कि सपा की दृष्टि और दृष्टिकोण केवल और केवल परिवार की उन्नति और प्रगति तक ही सीमित है।
यहां प्रदेश भाजपा मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत में पाठक ने कहा, ''समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव जी बुधवार को पार्टी का विजन डॉक्यूमेंट पढ़ रहे थे। मुझे समझ नहीं आया कि जिस पार्टी का कोई विजन ही नहीं है, वह जनता के लिए क्या विजन देखेगी।''
उपमुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि उनकी दृष्टि और दृष्टिकोण केवल और केवल परिवार की उन्नति और प्रगति तक ही सीमित है।
भाजपा नेता पाठक ने कहा,‘‘ इंडियन परिवार लीग (विपक्षी दलों के समूह इंडिया) में सबसे ज़्यादा मैच हार चुकी टीम के मुखिया द्वारा जारी विजन डॉक्यूमेंट में लिखी बातें किसी भी सूरत में सपा की नीतियों से मेल नहीं खाती हैं।’’
उन्होंने कहा ,‘‘ सपा मुखिया अपनी करारी हार के डर से मैदान से बाहर हैं। वह चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। वह जनता से किये गए धोखे का विजन लिए घूम रहे हैं, जिसमें माफिया राज, गुंडाराज की वापसी की ही बात प्रमुख है।’’
बार-बार सपा में उम्मीदवार बदले जाने का हवाला देते हुए पाठक ने कहा कि अखिलेश जी को जब ख़ुद अपने उम्मीदवारों पर ही भरोसा नहीं है, कुछ घंटों में टिकट बदल दे रहे हैं, तो वे जनता से किए वादे कैसे निभा पायेंगे।
पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों के लिए सपा द्वारा दिए गए नारे पीडीए (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्याक) पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि यह पीडीए " परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी" (परिवार विकास प्राधिकरण)’’ है।
उन्होंने कहा,‘‘ उत्तर प्रदेश ने 2012-17 के दौरान इनकी सरकार का शासन देख लिया है। इनसे ऊबकर ही प्रदेश की जनता ने भाजपा को चुना है, क्योंकि उसने मोदी जी के नेतृत्व में भारत की तरक्की देखी है। उत्तर प्रदेश में योगी जी के नेतृत्व में दूसरी बार सरकार जनता के आशीर्वाद से ही बनी है।’’
सपा प्रमुख ने इससे पहले दिन में बुधवार को एक पार्टी घोषणापत्र जारी किया था जिसमें 2025 तक जाति आधारित जनगणना, एमएसपी के लिए कानूनी गारंटी और अग्निपथ योजना को खत्म करने का वादा किया गया था।
भाषा आनन्द