मैं अच्छी फिल्में बनाने में विश्वास रखता हूं: मलयालम अभिनेता-फिल्म निर्माता
प्रीति माधव
- 14 Feb 2025, 07:58 PM
- Updated: 07:58 PM
(राधिका शर्मा)
नयी दिल्ली, 14 फरवरी (भाषा) मलयालम फिल्मों के निर्देशक बेसिल जोसेफ ने कहा कि उनकी शुरू से ही फिल्म निर्माण में दिलचस्पी रही, लेकिन वित्तीय स्थिति ज्यादा मजबूत न होने के कारण पहले उन्होंने एक अभिनेता के तौर पर फिल्मों में अभिनय कर सफलता हासिल की, जिसके बाद फिल्म निर्माण करना शुरू किया।
फिल्म ‘गोधा’, ‘मिन्नल मुरली’ के लिए प्रसिद्ध बेसिल जोसेफ ने कहा कि वह उन लोगों में से नहीं हैं, जो फिल्म को एक परियोजना के रूप में देखते हैं।
जोसेफ ने अब तक केवल तीन फिल्म ‘कुंजिरामायणम’ (2015), ‘गोधा’ (2017), और ‘मिन्नल मुरली’ (2021) का निर्देशन किया है, लेकिन एक अभिनेता के रूप में वह अब तक लगभग 50 फिल्मों में अभिनय कर चुके हैं। उन्होंने साल 2013 की फिल्म ‘अप एंड डाउन: मुकलिल ओरलुंडु’ से शुरुआत की थी और वह ‘जोजी’, ‘जन.ई.मैन’, ‘फालिमी’ और ‘सूक्ष्मदर्शिनी’ में भी नजर आए हैं।
बतौर अभिनेता जोसेफ की हाल में फिल्म ‘पोनमैन’ रिलीज हुई है, जिसका निर्देशन जोथिश शंकर ने किया है। यह 30 जनवरी को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी।
जोसेफ ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए एक साक्षात्कार में कहा, ‘‘मैंने ‘पार्ट-टाइम’ अभिनेता के तौर पर शुरुआत की थी। मुझे अपने एक दोस्त की फिल्म में काम करने के लिए बुलाया गया और उस किरदार को लोगों ने पसंद किया। फिर मुझे एक और भूमिका मिली। मैंने फिल्म निर्देशक बनने के लिए अपनी वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के उद्देश्य से अभिनय करना शुरू किया था। अगर आप निर्देशक हैं और आपको किसी अभिनेता को अपनी फिल्म में काम करने की पेशकश करनी होती है तो आपको उसके द्वारा दी गईं तारीखों के लिए इंतजार करना पड़ता है। आपको लिखना होता है और इंतजार करना पड़ता है, लेकिन मेरे एक अभिनेता होने के नाते ये परेशानियां दूर हो गईं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने इंतजार करने के दौरान अपने पैरों पर खड़ा होना सीखा जिससे आपको एक के बाद फिल्में बनाने के लिए बेताब न रहना पड़े। मैं किसी तरह की परियोजना को नहीं, बल्कि अच्छी फिल्में बनाने में यकीन रखता हूं। एक अभिनेता होने की वजह से मुझे आर्थिक रूप से मजबूत होने में मदद मिली, जिससे मैं अपनी सुविधा के अनुसार फिल्में कर सकूं।’’
उन्होंने माना कि सफलता और प्रशंसा मिलने से एक अभिनेता के रूप में उनकी जिम्मेदारी बढ़ गई है।
भाषा प्रीति