फ्रेट टर्मिनल की धूल से बढ़ता प्रदूषण, लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा
Dailyworld
- 21 Apr 2026, 05:07 PM
- Updated: 05:07 PM
डेली वर्ल्ड/रामगढ़वा
रेलवे स्टेशन के फ्रेट टर्मिनल (रेक पॉइन्ट) पर इन दिनों पत्थर के टुकड़ों की लगातार हो रही ढुलाई से उत्पन्न धूलकण स्थानीय वातावरण को गंभीर रूप से प्रदूषित कर रहे हैं। ट्रेनों के माध्यम से बड़े पैमाने पर लाए जा रहे पत्थरों की लोडिंग और अनलोडिंग के दौरान भारी मात्रा में सूक्ष्म धूल हवा में फैल रही है, जिससे आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सांस संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि जब भी मालगाड़ी स्टेशन पर पहुंचती है और पत्थरों को उतारा जाता है, तो पूरे क्षेत्र में धूल का गुबार छा जाता है। यह धूल कई घंटों तक हवा में बनी रहती है और धीरे-धीरे घरों, पेड़ों और जल स्रोतों पर जम जाती है। इससे न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
डॉक्टरों के अनुसार, इस प्रकार के धूलकणों में सूक्ष्म कण (PM2.5 और PM10) होते हैं, जो फेफड़ों में जाकर गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों के लिए यह स्थिति अधिक खतरनाक साबित हो रही है। कई लोगों ने खांसी, सांस फूलना, आंखों में जलन और एलर्जी जैसी समस्याओं की शिकायत की है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह क्षेत्र धीरे-धीरे गंभीर वायु प्रदूषण की चपेट में आ सकता है। उन्होंने सुझाव दिया है कि पत्थरों की ढुलाई के दौरान पानी का छिड़काव किया जाए ताकि धूल को उड़ने से रोका जा सके। इसके अलावा, माल ढुलाई क्षेत्र को ढकने और नियमित सफाई की व्यवस्था भी की जानी चाहिए।
स्थानीय प्रशासन और रेलवे विभाग की ओर से अभी तक इस समस्या को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस समस्या का जल्द समाधान किया जाए और प्रदूषण नियंत्रण के लिए प्रभावी उपाय लागू किए जाएं।
यदि इस दिशा में जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो यह समस्या भविष्य में एक बड़े पर्यावरणीय संकट का रूप ले सकती है। फिलहाल, रामगढ़वा फ्रेट टर्मिनल क्षेत्र के चौहद्दी में बसे गांवों के लोग साफ हवा के लिए संघर्ष कर रहे हैं और प्रशासन से त्वरित हस्तक्षेप की उम्मीद लगाए हुए हैं।