दिल्ली पुलिस ने स्कूल में बम की धमकी देने के आरोपी का संबंध राजनीतिक रूप से संबद्ध एनजीओ से जोड़ा
प्रशांत दिलीप
- 14 Jan 2025, 08:19 PM
- Updated: 08:19 PM
नयी दिल्ली, 14 जनवरी (भाषा) दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को दावा किया कि शहर के 400 से अधिक स्कूलों में बम की फर्जी धमकी भेजने वाले 12वीं कक्षा के छात्र की पहचान कर ली गई है और उसके माता-पिता एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) से जुड़े हैं, जो एक राजनीतिक दल का समर्थन करता है।
पुलिस ने हालांकि राजनीतिक पार्टी का नाम नहीं बताया और कहा कि आगे की जांच जारी है।
पुलिस के एक अधिकारी ने कहा कि लड़के से पूछताछ की गई और जांच के दौरान पाया गया कि एनजीओ ने संसद हमले के दोषी अफजल गुरु का भी समर्थन किया था।
पुलिस के अनुसार, एनजीओ की एक राजनीतिक पार्टी से निकटता, विघटनकारी रणनीति के माध्यम से सार्वजनिक अशांति पैदा करने की संभावित बड़ी साजिश के संबंध में गंभीर सवाल उठाती है।
विशेष पुलिस आयुक्त (कानून व्यवस्था) मधुप तिवारी ने यहां पुलिस मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में बताया, “हम ई-मेल ट्रैक कर रहे थे और वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (वीपीएन) की वजह से, उनके स्रोत का पता लगाना मुश्किल था। हमें यह भी पता लगाना था कि क्या इसमें कोई आतंकी पहलू भी है।”
उन्होंने कहा कि वीपीएन के उपयोग के कारण सेवा प्रदाता पुलिस की मदद नहीं कर पा रहे थे।
अधिकारी ने कहा, “हमारी टीम ने आठ जनवरी को हाल ही में मिले ई-मेल के बाद नाबालिग को ट्रैक किया। चूंकि ई-मेल भेजने वाला एक किशोर था, इसलिए टीम ने फॉरेंसिक जांच के लिए उसका लैपटॉप और मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिया।”
नाबालिग ने अपना अपराध कबूल कर लिया और यह स्थापित हो गया कि वह दिल्ली के 400 से अधिक स्कूलों को भेजी गई इसी प्रकार की धमकियों की कई पूर्व घटनाओं में शामिल था, जिनमें पिछले वर्ष एक मई को भेजी गई 250 धमकियां भी शामिल हैं।
अधिकारी ने कहा, “आरोपी ने अपनी पहचान छिपाने के लिए अनेक गुमनाम और कूट ई-मेल सेवा प्रदाताओं और उन्नत उपकरणों का इस्तेमाल किया।”
पुलिस टीम ने नाबालिग द्वारा भेजे गए 400 धमकी भरे ई-मेल ट्रैक किए। उन्होंने उसके पिता की पृष्ठभूमि की भी जांच की, जो एक एनजीओ के साथ काम कर रहे हैं, और पता चला कि यह संगठन एक नागरिक संस्था समूह का हिस्सा है, जो अफजल गुरु की फांसी के मुद्दे को उठाता रहा है और एक राजनीतिक दल की मदद भी कर रहा है।
पुलिस ने एक बयान में कहा कि एनजीओ का एक राजनीतिक पार्टी के साथ पुराना और गहरा संबंध है।
पुलिस ने कहा, “यह एनजीओ खुले तौर पर राजनीतिक पार्टी की वकालत करने के लिए जाना जाता है। एनजीओ के विवरण के विश्लेषण से पता चला कि यह 2001 के संसद हमले में शामिल एक दोषी आतंकवादी अफजल गुरु की फांसी का विरोध करने और विभिन्न मुद्दों पर एक विशेष राजनीतिक पार्टी का समर्थन करने के लिए खुले तौर पर वकालत करने के लिए जाना जाता है।”
नाबालिग आरोपी के उद्देश्य के बारे में तिवारी ने कहा कि प्रारंभिक जांच और एकत्र साक्ष्यों के विश्लेषण से पता चला है कि फर्जी ई-मेल के पीछे मुख्य उद्देश्य स्कूलों में दहशत और व्यवधान पैदा करना था।
उन्होंने कहा कि ये फर्जी धमकियां अत्यधिक कूट (एन्क्रिप्टेड) ई-मेल सेवाओं और जटिल डिजिटल मार्गों के माध्यम से दी गईं, जिससे स्पष्ट रूप से पहचान छिपाने और पता लगने से बचने का इरादा जाहिर होता है।
पुलिस ने पुष्टि की है कि दिल्ली के स्कूलों को 12 फरवरी, 2024 से बम की धमकियां मिलनी शुरू हुईं और वे पूरे नेटवर्क की जांच कर रहे हैं।
अधिकारी ने कहा, “इस वर्ष 8 जनवरी को एक बड़ी सफलता तब मिली, जब दिल्ली के लगभग 23 स्कूलों को ई-मेल के माध्यम से बम की धमकी मिली, जिससे व्यापक दहशत फैल गई, स्कूल बंद हो गए और शैक्षणिक गतिविधियां बाधित हुईं।”
उन्होंने कहा कि आठ जनवरी के ई-मेल के बाद पुलिस ने इसे (ई-मेल) भेजने वाले की पहचान कर ली, उससे पूछताछ की तथा उसका लैपटॉप और दो मोबाइल फोन जब्त कर लिए।
तिवारी ने कहा, “इन उपकरणों का प्रारंभिक फॉरेंसिक विश्लेषण किया गया, जिससे पता चला कि आरोपी सीधे तौर पर धमकी भरे ई-मेल से जुड़ा है।”
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