दृष्टिबाधित और साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता असुदानी ने और अधिक कथा साहित्य लिखने की योजना बनाई
रंजन रंजन संतोष
- 10 Mar 2024, 04:38 PM
- Updated: 04:38 PM
ṁ(मनोज राममोहन)
मुंबई, 10 मार्च (भाषा) साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त करने वाले पहले दृष्टिबाधित लेखक विनोद असुदानी का कहना है कि वह और अधिक कथा साहित्य की रचना करने की योजना बना रहे हैं और दिव्यांगता सौंदर्यशास्त्र में उनका दृढ़ विश्वास है।
पेशे से प्रोफेसर असुदानी को बतौर लेखक लिखने का जुनून है। उन्होंने कहा, ‘‘मेरे मन पर जो भी प्रभाव पड़ते हैं वे आंखों के माध्यम से बाहर नहीं आते।’’
उम्र के पांच दशक बिता चुके इस दिव्यांग लेखक का कहना है कि मुझे यह अन्य इंद्रियों के माध्यम से मिलता है... अन्य इंद्रियों के माध्यम से मुझ तक लाए गए सुखद प्रभाव मेरे लिए सौंदर्यशास्त्र का निर्माण करते हैं ।’’
असुदानी ने एक साक्षात्कार में ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक अच्छी आवाज और एक अच्छा स्पर्श भी उनके लिए सुंदरता है।
भविष्य की योजनाओं के बारे में असुदानी ने कहा कि वह अनुवाद करना जारी रखेंगे और अधिक (काल्पनिक) कथा साहित्य पर काम करेंगे ।
मुंबई में हाल ही में संपन्न गेटवे साहित्य महोत्सव के मौके पर कार्यक्रम से इतर बातचीत में उन्होंने कहा, "मैं कविता भी लिखना जारी रखूंगा लेकिन मेरा इरादा कथा साहित्य में भी आने का है। मेरे पास अंग्रेजी में एक उपन्यास है, लेकिन वह पर्याप्त नहीं है... मैं कथा साहित्य के साथ प्रयोग करना चाहता हूं। मेरे पास एक अंग्रेजी उपन्यास और अंग्रेजी लघु कथाओं का एक सेट है।’’
असुदानी ने 37 पुस्तकें प्रकाशित की हैं जिनमें से 19 उनकी अपनी रचना है। उनकी 19 कृतियों में से छह सिंधी में, दो हिंदी में और 11 अंग्रेजी में हैं।
शेष 18 रचना विभिन्न लेखकों की सिंधी से अंग्रेजी में अनुवाद हैं और उनमें से पांच रचना उन लेखकों की हैं, जिन्होंने साहित्य अकादमी पुरस्कार जीता है।
स्वलेखन एवं अनुवाद की 37 पुस्तकों के प्रकाशन के बाद अब वह कथा साहित्य के क्षेत्र में और अधिक काम करना चाहते हैं।
उनकी सिंधी काव्य रचना 'हाथू पाकीदिजैन’ (कविता-गजल) के लिये उन्हें 2023 के साहित्य अकादमी पुरस्कार के लिये चयनित किया गया है। यह पुरस्कार उन्हें इस महीने राष्ट्रीय राजधानी में प्रदान किया जाएगा।
उनका दृढ़ विश्वास है कि साहित्य अकादमी पुरस्कार उन्हें विकलांगता साहित्य को मुख्यधारा में लाने में मदद करेगा।
असुदानी के लिए चीजें प्राथमिकता का विषय हैं और शिक्षण उनकी रोजी-रोटी है।
उन्होंने बताया, ‘‘यह प्राथमिकता का मामला है। शिक्षण मेरी रोजी-रोटी है... साहित्य मेरा पहला जुनून है, फिर प्रेरक बातें, फिर सामाजिक प्रतिबद्धताएं...।’’
काम के लिहाज वह किसे सफलता मानते हैं, इस सवाल के जवाब में असुदानी ने कहा कि वह अपने काम से संतुष्ट हैं।
भाषा रंजन रंजन