बांग्लादेश में गिरफ्तार हिंदू संत को राहत नहीं, जमानत पर सुनवाई दो जनवरी को होगी
सिम्मी संतोष
- 03 Dec 2024, 05:55 PM
- Updated: 05:55 PM
ढाका, तीन दिसंबर (भाषा) बांग्लादेश की एक अदालत ने हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास ब्रह्मचारी की ओर से किसी वकील के पेश नहीं होने की स्थिति में एक सरकारी अर्जी पर उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई दो जनवरी तक के लिए स्थगित कर दी।
बांग्लादेश सम्मिलित सनातनी जागरण जोत के प्रवक्ता दास को 25 नवंबर को ढाका के हजरत शाहजलाल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
चटगांव की एक अदालत ने 26 नवंबर को उन्हें जमानत देने से इनकार करते हुए जेल भेज दिया था जिसके बाद उनके समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया था।
एक सरकारी अभियोजक ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘(ब्रह्मचारी की) जमानत याचिका पर सुनवाई आज (मंगलवार) के लिए निर्धारित थी... मेट्रोपॉलिटन सत्र न्यायाधीश मोहम्मद सैफुल इस्लाम की अदालत ने तारीख पुनर्निर्धारित कर दी, क्योंकि बचाव पक्ष की ओर से किसी वकील के उपस्थित नहीं होने पर अभियोजन पक्ष ने समय देने के लिए याचिका दायर की।’’
दूसरी ओर, सम्मिलित सनातनी जागरण जोत में दास के सहयोगी स्वतंत्र गौरांग दास ने कहा कि ‘‘राजनीति से प्रेरित वकीलों के समूह’’ के दबाव और धमकियों के डर से कोई भी वकील हिंदू संत के पक्ष में खड़ा नहीं हुआ।
बांग्लादेश के झंडे का अपमान करने के लिए राजद्रोह के आरोप में चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी के बाद भड़की हिंसा में बंदरगाह शहर में एक सरकारी अभियोजक की मौत हो गई थी।
जमानत याचिका पर सुनवाई के मद्देनजर चटगांव अदालत परिसर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी और विभिन्न बलों के सुरक्षा अधिकारियों को बड़ी संख्या में तैनात किया गया था। दास को सुनवाई के लिए अदालत नहीं लाया गया था।
दास की गिरफ्तारी के बाद उनके समर्थकों ने ढाका और अन्य स्थानों पर प्रदर्शन किया था। बंदरगाह शहर चटगांव में यह विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया था जिसमें सहायक सरकारी अभियोजक सैफुल इस्लाम अलिफ की मौत हो गई थी।
अगस्त में तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे और मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के सत्ता में आने के बाद से भारत और बांग्लादेश के संबंधों में तनाव व्याप्त है।
भारत ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं पर हमलों को लेकर चिंता व्यक्त की है। बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसक हमलों में हाल में वृद्धि हुई है।
भाषा सिम्मी