जॉर्जिया में प्रदर्शनकारियों की पुलिस के साथ झड़प, 100 से अधिक गिरफ्तार
एपी धीरज माधव
- 30 Nov 2024, 04:33 PM
- Updated: 04:33 PM
त्बिलिसी(जॉर्जिया), 30 नवंबर (एपी)जॉर्जिया को यूरोपीय संघ में शामिल करने के प्रयास के तहत शुरू हुई वार्ता को रोकने के सरकार के फैसले का विरोध कर रहे हजारों प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच शुक्रवार रात को हुई झड़प के मामले में 100 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। देश के आंतरिक मंत्रालय ने शनिवार को यह जानकारी दी।
देश की सत्तारूढ़ जॉर्जियाई ड्रीम पार्टी के प्रधानमंत्री इराकली कोबाखिद्जे द्वारा बृहस्पतिवार को वार्ता स्थगित करने की घोषणा के बाद शुक्रवार को लगातार दूसरी रात विरोध प्रदर्शन हुआ। प्रदर्शनकारियों की शुक्रवार देर रात राजधानी त्बिलिसी और काला सागर बंदरगाह बटुमी सहित कई प्रमुख जॉर्जियाई शहरों में पुलिस के साथ झड़प हुई।
एसोसिएटेड प्रेस के संवाददाताओं ने देखा कि त्बिलिसी में प्रदर्शनकारियों को पुलिस द्वारा दौड़ा-दौड़ा कर पीटा गया, जबकि प्रदर्शनकारी देश की संसद भवन तक पहुंचने की कोशिश कर रहे थे।
दंगा पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को इमारत से दूर रखने के लिए पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया और बाद में उन्हें शहर के मुख्य मार्ग रुस्तावेली एवेन्यू से पीछे धकेल दिया।
पुलिस ने मीडियाकर्मियों के खिलाफ भी भारी बल का प्रयोग किया तथा लाउडस्पीकर का इस्तेमाल कर भीड़ को अपशब्द कहें।
देश में 26 अक्टूबर को हुए संसदीय चुनाव में ‘जॉर्जियाई ड्रीम’ की विवादित जीत हुई, जिसे व्यापक रूप से जॉर्जिया की यूरोपीय संघ में शामिल होने की आकांक्षाओं पर जनमत संग्रह के रूप में देखा गया। इसकी जीत के बाद बड़े पैमाने पर प्रदर्शनों की शुरुआत हुई और विपक्ष ने संसद का बहिष्कार करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
विपक्ष ने दावा किया कि जॉर्जिया के पूर्व शाही नेता ने रूस की मदद से मतदान में धांधली की। उसने दावा किया कि रूस, जॉर्जिया को अपने नियंत्रण में रखना चाहता है।
जॉर्जिया की राष्ट्रपति सैलोम जौराबिचविली ने बृहस्पतिवार को प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया और आरोप लगाया कि सरकार ने अपने ही लोगों के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी है। उन्होंने शुक्रवार को राष्ट्र के नाम संबोधन में पुलिस से प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग न करने का आग्रह किया।
यूरोपीय संघ ने दिसंबर 2023 में जॉर्जिया को उम्मीदवार का दर्जा इस शर्त पर दिया था कि वह उसकी सिफारिशों को लागू करेगा, लेकिन इस साल की शुरुआत में एक ‘‘विदेशी प्रभाव’’ कानून के पारित होने के बाद उसने संघ में शामिल होने की प्रक्रिया पर रोक लगा दी और वित्तीय सहायता में कटौती कर दी गई, जिसे व्यापक रूप से लोकतांत्रिक स्वतंत्रता के लिए झटका माना जाता है।
एपी धीरज