कार्बन उत्सर्जन स्तर को नगण्य करके ही वैश्विक औसत तापमान को स्थिर करना संभव : अध्ययन
सुरेश मनीषा
- 29 Oct 2024, 05:07 PM
- Updated: 05:07 PM
नयी दिल्ली, 29 अक्टूबर (भाषा) शोधकर्ताओं का मानना है कि केवल कार्बन उत्सर्जन के स्तर को नगण्य करके ही वैश्विक औसत तापमान को स्थिर किया जा सकता है।
जर्मनी के पॉट्सडैम इंस्टीट्यूट फॉर क्लाइमेट इम्पैक्ट रिसर्च (पीआईके) के शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन के हवाले से जानकारी दी है कि दुनिया के लगभग 30 प्रतिशत वैसे क्षेत्रों का कार्बन उत्सर्जन स्तर नगण्य हो चुका है जहां अर्थव्यवस्था बढ़ रही है, इनमें से कई देश यूरोप से हैं।
शोध में कहा गया है कि इसके विपरीत, उत्तरी अमेरिका और एशिया ने पिछले दशकों में अधिक उतार-चढ़ाव वाले विघटन के रुझान दिखाए हैं, जबकि पिछले दशक में सुधार देखा गया था।
वर्ष 2050 तक उत्सर्जन के स्तर को शून्य तक लाना 2015 के पेरिस समझौते के लक्ष्यों में से एक है और इसका उद्देश्य उत्सर्जित कार्बन और अवशोषित कार्बन के बीच संतुलन बनाना है। वैश्विक औसत तापमान में वृद्धि को 1.5 से दो डिग्री सेल्सियस के बीच सीमित करना महत्वपूर्ण माना जाता है, जिसे व्यापक रूप से 'पेरिस समझौते के तापमान लक्ष्य' के रूप में जाना जाता है।
पीआईके के शोधकर्ता एवं ‘‘प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज’’ नामक पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के सह-लेखक एंडर्स लीवरमैन ने कहा, ‘‘वैश्विक औसत तापमान का स्थिर होना केवल कार्बन उत्सर्जन के स्तर को नगण्य करके ही संभव है। इसका मतलब यह है कि अगर अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ाना है तो उन्हें कार्बन उत्सर्जन से अलग होना होगा।’’
शोधकर्ताओं ने दुनिया भर के 1,500 उप-राष्ट्रीय (या राष्ट्रीय स्तर से नीचे) क्षेत्रों के आर्थिक आउटपुट का विश्लेषण किया, जहां प्रति व्यक्ति सकल क्षेत्रीय उत्पाद (जीआरपी) बढ़ रहा था, जो वैश्विक उत्सर्जन का 85 प्रतिशत था। फिर शोधकर्ताओं के दल ने इसे पिछले 30 वर्षों में उत्पादन गतिविधियों के कारण कार्बन उत्सर्जन के डेटा के साथ जोड़ा।
शोधपत्र के लेखकों के अनुसार, ‘‘उप-राष्ट्रीय जलवायु कार्रवाइयों पर अधिक खर्च करने वाले आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) के देश उच्च वियोजन दर प्रदर्शित करते हैं और ऐसा ही यूरोपीय संघ के देशों के वैसे उप-राष्ट्रीय क्षेत्र भी करते हैं, जहां जलवायु नीतियों को लागू किया गया है।’’
लेवरमैन ने कहा, ‘‘उच्च आय वाले क्षेत्र और कार्बन उत्सर्जन की दृष्टि से संवेदनशील उद्योगों के इतिहास के साथ-साथ सेवा और विनिर्माण क्षेत्रों के महत्वपूर्ण हिस्से वाले क्षेत्र आर्थिक विकास का अनुभव करते हुए भी कार्बन उत्सर्जन को कम करने में विशेष रूप से सफल रहे हैं।’’
पीआईके के एक शोधकर्ता एवं प्रमुख लेखक मारिया जियोगा ने कहा, ‘‘विशेष रूप से, यूरोपीय संघ के वैसे शहर जिन्होंने जलवायु को सुधारने से संबंधित योजनाएं लागू की हैं और जिन क्षेत्रों को जलवायु कार्रवाइयों के लिए अधिक वित्तीय सहायता मिली है, वे वियोजन की उच्च दर दिखाते हैं।’’
भाषा सुरेश