शिलांग 2025 में भारतीय यात्रियों का सबसे पसंदीदा गंतव्य: रिपोर्ट
पारुल संतोष
- 23 Oct 2024, 07:19 PM
- Updated: 07:19 PM
नयी दिल्ली, 23 अक्टूबर (भाषा) भारतीय यात्रियों ने 2025 में मेघालय की राजधानी शिलांग को घूमने-फिरने के लिए अपने सबसे पसंदीदा गंतव्य के रूप में चुना है। वैश्विक यात्रा ऐप ‘स्काईस्कैनर’ की वार्षिक ‘ट्रैवल ट्रेंड रिपोर्ट’ से यह बात सामने आई है।
शिलांग बुधवार को जारी इस रिपोर्ट में शामिल एकमात्र भारतीय शहर है।
भारतीय यात्रियों की अगले साल की यात्रा को लेकर रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 66 फीसदी भारतीय 2025 में “और भी ज्यादा घूमना-फिरना” चाहते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, “पूरब का स्कॉटलैंड कहलाने वाला शिलांग उन पसंदीदा गंतव्यों की सूची में पहले पायदान पर है, जो अपने विविध अनुभवों के साथ-साथ आराम और रोमांच का एहसास करने का शानदार अवसर उपलब्ध कराते हैं। अजरबैजान का बाकू और मलेशिया का लंगकावी सूची में क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं।”
रिपोर्ट के अनुसार, “भारतीय अगले साल जिन अन्य शहरों की यात्रा करने के बारे में सोच रहे हैं और इंटरनेट पर उनसे जुड़ी जानकारियां खंगाल रहे हैं, उनमें नॉर्वे का ट्रोम्सो, उज्बेकिस्तान का ताशकंद और सऊदी अरब का अल-उला शामिल हैं। इससे साबित होता है कि भारतीय विविध और यादगार अनुभव की चाह में नये गंतव्यों की तलाश कर रहे हैं।”
यह रिपोर्ट एक हजार भारतीय यात्रियों पर की गई रायशुमारी पर आधारित है।
इसमें ‘बेस्ट वैल्यू डेस्टिनेशन सूची’ भी प्रकाशित की गई है, जिसमें उन शहरों के नाम शामिल हैं, जो पैसों के लिहाज से सबसे यादगार अनुभव देते हैं और पिछले एक साल में जिनके हवाई टिकट के दाम में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, “कजाकिस्तान का अल्माटी ‘बेस्ट वैल्यू डेस्टिनेशन सूची’ में पहले स्थान पर है, जिसके हवाई टिकट की कीमत में 44 फीसदी की कमी आई है। इंडोनेशिया का जकार्ता इस सूची में दूसरे और सिंगापुर व कुआलालंपुर (मलेशिया) तीसरे स्थान पर है, जिनके हवाई टिकट के दाम क्रमश: 27 फईसदी और 19-19 फीसदी घटे हैं।”
रिपोर्ट के अनुसार, घूमने-फिरने के लिए किसी शहर को चुनने के दौरान भारतीय यात्री यात्रा पर होने वाले कुल खर्च को सबसे ज्यादा अहमियत देते हैं। इसमें कहा गया है कि 65 फीसदी भारतीयों के लिए होटल का खर्च, 62 फीसदी के लिए हवाई सफर का खर्च और 54 फीसदी के लिए खाने-पीने का खर्च फैसला लेने की प्रक्रिया में अहम कारक होता है।
भाषा पारुल