नशे की लत स्वास्थ्य समस्या न कि आपराधिक कृत्य: हिमाचल प्रदेश पुलिस प्रमुख
जितेंद्र माधव
- 03 Oct 2024, 04:51 PM
- Updated: 04:51 PM
(भानू पी लोहुमी)
शिमला, तीन अक्टूबर (भाषा) हिमाचल प्रदेश के पुलिस प्रमुख ने बृहस्पतिवार को कहा कि कम मात्रा में प्रतिबंधित मादक पदार्थों के साथ पकड़े जाने वाले नशे के आदी लोगों के साथ अपराधियों की तरह बर्ताव नहीं किया जाना चाहिए बल्कि उन्हें सुधरने का मौका दिया जाना चाहिए।
इस कदम के पीछे का कारण पिछले कुछ वर्षों में स्वापक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थ (एनडीपीएस)अधिनियम के तहत दर्ज मुकदमों की संख्या में कई गुना वृद्धि है। इस अपराध के तहत मुकदमों की संख्या 2014 में 644 थी, जो 2023 में बढ़कर 2,147 हो गई। इसका मतलब यह है कि सजा से कुछ खास ज्यादा फर्क नहीं पड़ा।
पुलिस आंकड़ों के अनुसार, 2023 में एनडीपीएस अधिनियम के तहत 103 महिलाओं और छह विदेशियों सहित कुल 3,118 लोगों को गिरफ्तार किया गया, इनमें से केवल 200 से 250 लोगों के पास से ही प्रतिबंधित पदार्थों की खरीदने व बेचने की मात्रा जब्त की गयी।
अधिकारी ने बताया कि इनमें से अधिकतर लोग नशे की लत से तस्कर बने थे और इन्होंने अपनी जरूरत पूरी करने के लिए यह काम किया।
पुलिस महानिदेशक अतुल वर्मा ने बृहस्पतिवार को ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, “इनमें से कुछ लोग अपराधी नहीं हैं। वे स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं। उन्हें एनडीपीएस अधिनियम की धारा 64 ए के तहत सुधरने का मौका दिया जाना चाहिए। यह कानून कम मात्रा में प्रतिबंधित पदार्थों के साथ पकड़े गए लोगों को मुकदमे से छूट प्रदान करता है।”
उन्होंने बताया कि इस प्रावधान का राज्य में कभी इस्तेमाल नहीं किया गया। अधिकारी ने बताया, “नशे के आदी लोगों की पहचान की प्रक्रिया शुरू हो गई है। एनडीपीएस अधिनियम की धारा 64 ए के बारे में जागरूकता पैदा करने और इन लोगों को चिकित्सा उपचार के माध्यम से सुधरने के लिए मनाने के लिए गैर सरकारी संगठनों और सेवानिवृत्त अभियोजकों को शामिल किया जाएगा।”
इस पहल की देखरेख का जिम्मा बटालियन के तीन कमांडेंट करेंगे, जिसमें उत्तरी रेंज के महानिरीक्षक अभिषेक धुल्लर मुख्य संसाधन व्यक्ति के रूप में कार्य करेंगे।
वर्मा ने बताया कि 2023 में राज्य की जेलों में बंद लगभग 3,000 कैदियों में से लगभग 40 प्रतिशत पर एनडीपीएस के मुकदमे दर्ज थे। इससे हिमाचल प्रदेश में मादक पदार्थों की समस्या की गंभीरता का पता चलता है।
एनडीपीएस अधिनियम की धारा 27 के अनुसार, किसी भी मादक पदार्थ के सेवन या कम मात्रा में मादक पदार्थ के साथ पकड़े जाने पर एक साल तक की जेल और 10,000 से 20,000 रुपये का जुर्माने का प्रावधान है। हालांकि अधिनियम की धारा 64 ए उपचार चाहने वाले अपराधियों को मुकदमे से ‘छूट’ प्रदान करती है।
भाषा जितेंद्र