साइबर हमले राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा: राष्ट्रपति मुर्मू
आशीष पवनेश
- 01 Oct 2024, 07:48 PM
- Updated: 07:48 PM
(फोटो के साथ)
नयी दिल्ली, एक अक्टूबर (भाषा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को कहा कि साइबर हमले राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बनकर उभरे हैं और इन्हें विफल करने में सक्षम सुरक्षित राष्ट्रव्यापी प्रणाली बनाने के लिए सिविल सेवाओं और सशस्त्र बलों को मिलकर काम करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा चिंताएं क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा से कहीं आगे तक फैली हुई हैं तथा इसमें राष्ट्रीय कल्याण के अन्य क्षेत्र भी शामिल हैं, जैसे आर्थिक, पर्यावरणीय, ऊर्जा सुरक्षा और साइबर सुरक्षा से संबंधित मुद्दे।
राष्ट्रपति भवन में मुलाकात के लिए आए राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय (एनडीसी) के संकाय और पाठ्यक्रम सदस्यों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘इन चिंताओं को दूर करने के लिए गहन शोध की आवश्यकता है, और इन व्यापक मुद्दों से निपटने के लिए समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता है।’’ मुर्मू ने कहा कि साइबर हमले राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बनकर उभरे हैं।
उन्होंने कहा कि साइबर हमलों से निपटने और उनका मुकाबला करने के लिए उच्च-स्तरीय तकनीकी हस्तक्षेप के साथ-साथ मजबूत डिजिटल बुनियादी ढांचे के साथ अच्छी तरह से प्रशिक्षित और विशेष मानव संसाधन की आवश्यकता होती है।
राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘यह एक ऐसा मुद्दा है जो सभी क्षेत्रों में देश के संपूर्ण शासन ढांचे को प्रभावित करता है। यह उन क्षेत्रों में से एक है जहां हमारी सिविल सेवाओं और सशस्त्र बलों को ऐसे हमलों को विफल करने में सक्षम एक सुरक्षित राष्ट्रव्यापी प्रणाली बनाने के लिए हाथ मिलाना चाहिए।’’
उन्होंने कहा कि शासन प्रणालियों में भारी मात्रा में डेटा और संवेदनशील जानकारी उपलब्ध है ‘‘जिसे असुरक्षित नहीं छोड़ा जा सकता।’’ उन्होंने इस मुद्दे की गंभीरता को समझने के साथ ही इसके समाधान के लिए ठोस कदम उठाने का आग्रह किया।
मुर्मू ने कहा कि सशस्त्र बलों की भूमिका पारंपरिक सैन्य मामलों से कहीं आगे तक विस्तारित हो चुकी है। राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘लक्ष्यों को प्राप्त करने में सबसे बड़ी बाधा यह है कि विभिन्न संगठन और विभाग अलग-अलग काम करते हैं। एक ओर, बड़े लक्ष्यों को प्राप्त करना कठिन हो जाता है, वहीं दूसरी ओर, विभिन्न विभागों द्वारा समान कार्य किए जाने से संसाधनों की कमी हो जाती है।’’
एनडीसी 64वें पाठ्यक्रम के सदस्यों और संकाय को संबोधित करते हुए, मुर्मू ने कहा कि प्रौद्योगिकी तेजी से आगे बढ़ रही है और इसके साथ तालमेल बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने कहा, ‘‘चाहे वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हो, डेटा साइंस हो, मशीन लैंग्वेज प्रोसेसिंग हो या ब्लॉकचेन हो, आपको इन प्रौद्योगिकियों के बारे में पता होना चाहिए और अपने विभागों में अधिक कुशल, पारदर्शी और उत्पादक कार्य संस्कृति बनाने के लिए उनका उपयोग करना चाहिए।’’
भाषा आशीष