मप्र: ग्वालियर में बायो सीएनजी संयंत्र से युक्त गौशाला स्थापित
दिमो धीरज
- 01 Oct 2024, 06:57 PM
- Updated: 06:57 PM
भोपाल, एक अक्टूबर (भाषा) मध्यप्रदेश के ग्वालियर में बायो सीएनजी संयंत्र से युक्त एक गौशाला स्थापित की गई है जिसमें 100 टन गाय के गोबर का इस्तेमाल करके प्रतिदिन तीन टन गैस का उत्पादन किया जा सकता है। मंगलवार को एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
जनसंपर्क विभाग के अधिकारी ने कहा कि इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) के सहयोग से स्थापित यह भारत की पहली आधुनिक और आत्मनिर्भर गौशाला है।
उन्होंने कहा कि संयंत्र में 100 टन गाय के गोबर का उपयोग करके प्रतिदिन तीन टन सीएनजी और 20 टन उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद का उत्पादन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आईओसी संयंत्र के संचालन और रखरखाव में सहायता करेगा।
अधिकारी ने बताया कि गौशाला का निर्माण आईओसी के कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व कोष से 32 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है तथा इसके भविष्य के विस्तार को देखते हुए इसके लिए एक हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि आरक्षित की गई है। दो हजार गौवंश के लिए आधुनिक गौशाला के निर्माण के लिए सांसद के स्थानीय क्षेत्र विकास कोष से दो करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के राष्ट्र के लिए ‘‘अपशिष्ट से धन’’ के सपने को साकार करने के लिए आभार व्यक्त किया तथा गायों की देखभाल करने वाले संतों और श्रद्धालुओं के समुदाय को धन्यवाद दिया।
उन्होंने कहा, ‘‘राज्य सरकार इस पहल के विस्तार के लिए हर संभव सहयोग देगी। यहां यह याद रखना जरूरी है कि इंदौर में एशिया का सबसे बड़ा बायो सीएनजी संयंत्र चालू है, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री ने किया था।’’
अधिकारियों के अनुसार ग्वालियर के लाल टिपारा गौशाला में स्थानीय नगर निगम के सहयोग से दस हजार गायों की देखभाल की जा रही है। जल्द ही एक ‘इनक्यूबेशन सेंटर’ भी शुरू किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इस संयंत्र से प्रतिदिन करीब दो से तीन टन बायो सीएनजी और 20 टन उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद का उत्पादन होगा। इससे ग्वालियर नगर निगम को करीब सात करोड़ रुपये की आय होगी। संयंत्र से गोबर का उपयोग कर गौशाला को आर्थिक रूप से सहारा मिलेगा।
अधिकारी ने बताया कि इससे आसपास के जिलों के किसानों को जैविक खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, क्योंकि उन्हें बहुत ही उचित मूल्य पर आसानी से जैविक खाद मिल जाएगी।
केंद्रीय पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय की हालिया रिपोर्ट के अनुसार गांवों में बायोगैस संयंत्र लगाने में मध्यप्रदेश तीसरे स्थान पर है। राज्य में विभिन्न गांवों में 104 बायोगैस संयंत्र हैं, जिनमें सबसे ज्यादा बैतूल में 24, बालाघाट में 13 और सिंगरौली में 12 बायोगैस संयंत्र हैं।
भाषा दिमो