अदालत ने आठ वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के मामले में व्यक्ति को दोषी करार दिया
जितेंद्र सुभाष
- 27 Sep 2024, 07:00 PM
- Updated: 07:00 PM
नयी दिल्ली, 27 सितंबर (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने आठ वर्षीय बच्ची से 2016 में दुष्कर्म किये जाने के मामले में एक व्यक्ति को दोषी करार देते हुए कहा कि पीड़िता की गवाही सबूतों से मेल खाती है, जिनमें सच्चाई है और अन्य साक्ष्यों से भी इसका मिलान हुआ है।
अदालत ने कहा कि झूठे आरोप लगाने की कोई संभावना ही नहीं है क्योंकि माता-पिता दुष्कर्म का झूठा आरोप लगाकर अपनी नाबालिग बेटी की प्रतिष्ठा को दांव पर नहीं लगाएंगे।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बबीता पुनिया व्यक्ति के खिलाफ मामले की सुनवाई कर रही है जो तीन अप्रैल 2016 को राष्ट्रीय राजधानी में बच्ची से दुष्कर्म करने का आरोपी है।
विशेष लोक अभियोजक श्रवण कुमार बिश्नोई ने बताया कि जब बच्ची एक गली से गुजर रही थी तभी आरोपी ने उसे अपने घर के अंदर खींच लिया तथा दरवाजा बंद कर दिया और उसके साथ दुष्कर्म किया। उन्होंने बताया कि पीड़िता का बयान विश्वसनीय और एक जैसा है।
न्यायाधीश ने 23 सितंबर को सुनाए गए अपने 62 पन्नों के फैसले में कहा, “पीड़िता की गवाही को ध्यान में रखते हुए मुझे लगता है कि उसके बयान में सच्चाई है। उसके बयान न केवल विश्वसनीय हैं, बल्कि सभी विवरणों पर भी खरे उतरते हैं।”
अदालत ने बचाव पक्ष के वकील की उस दलील को खारिज कर दिया, जिसमें पीड़िता द्वारा आरोपी की ठीक से नहीं पहचानने की बात कही गयी थी।
न्यायाधीश ने कहा, “यह अदालत इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं कर सकती कि वह एक ऐसी बच्ची के मामले की सुनवाई कर रही है, जो यौन उत्पीड़न की शिकार है। कथित घटना के समय, वह लगभग आठ साल की थी और उसकी गवाही छह साल से अधिक समय के अंतराल के बाद नौ दिसंबर 2022 को दर्ज की गई।”
अदालत ने कहा, “आरोपी लंबे समय से न्यायिक हिरासत में है और दो मामलों में मुकदमे का सामना कर रहा है, जिनमें एक दुष्कर्म का और दूसरा एक बाल पीड़ित की हत्या का मामला है। आरोपी को स्क्रीन पर दिखाया गया था और यह आम बात है कि समय बीतने के साथ हुलिया बदल जाता है।”
अदालत ने कहा कि गलत पहचान की कोई संभावना नहीं थी और आरोपी की पहचान पूरी तरह साबित हो चुकी है।
अदालत ने आरोपी को यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम की धारा छह (यौन उत्पीड़न) और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376 (दुष्कर्म), 342 (गलत तरीके से बंधक बनाना) और 363 (अपहरण) के तहत दोषी करार दिया।
सजा की अवधि पर दलीलें बाद में पेश की जाएंगी।
भाषा जितेंद्र