आईपीईएफ की पूर्ण क्षमता प्राप्त करने के लिए मजबूत क्षेत्रों में सहयोग की जरूरत : गोयल
अनुराग अजय
- 24 Sep 2024, 07:25 PM
- Updated: 07:25 PM
नयी दिल्ली, 24 सितंबर (भाषा) वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को कहा कि ‘समृद्धि के लिए हिंद-प्रशांत आर्थिक ढांचे’ (आईपीईएफ) की पूरी क्षमता का उपयोग तभी किया जा सकता है, जब साझेदार देश आपूर्ति शृंखला की चुनौतियों से निपटने के लिए प्रौद्योगिकी, निवेश, बाजार क्षमता और कुशल कार्यबल जैसे अपने मजबूत पक्षों का योगदान दें।
मंत्री ने आईपीईएफ मंत्रियों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एक बैठक में यह बात कही।
गोयल ने कहा कि फार्मास्युटिकल्स और चिकित्सा उपकरणों सहित स्वास्थ्य सेवा एक ‘अत्यंत प्रासंगिक’ क्षेत्र है, क्योंकि एपीआई और प्रमुख प्रारंभिक सामग्रियों के वैश्विक उत्पादन पर अत्यधिक ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। इससे आपूर्ति शृंखला की जुझारू क्षमता गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है और अर्थव्यवस्थाओं की स्वास्थ्य सेवा जरूरतों को पूरा करने की हमारी क्षमता प्रभावित हो सकती है।
उन्होंने कहा कि इसके अलावा, मल्टीमॉडल परिवहन प्रणाली, लॉजिस्टिक्स बुनियादी ढांचे का उन्नयन, उन्नत तकनीकी अंतर-संचालन और माल एवं लॉजिस्टिक्स उद्यमों के बीच डेटा प्रवाह कुछ प्रमुख क्षेत्र हैं जिनपर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।
मंत्रालय ने कहा, “उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आईपीईएफ की पूरी क्षमता का उपयोग तभी हो सकता है जब प्रत्येक साझेदार देश अपनी-अपनी ताकत सामने लाएं, चाहे वह प्रौद्योगिकी क्षेत्र में प्रगति हो या निवेश क्षमता या बाजार की संभावना या कुशल कार्यबल सहित अपेक्षित संसाधन, ताकि आपूर्ति शृंखला की जुझारू क्षमता या हरित परिवर्तन की विभिन्न चुनौतियों का समाधान किया जा सके।”
उन्होंने कहा कि निष्पक्ष अर्थव्यवस्था समझौते के तहत सहकर्मी को सिखाना, ज्ञान साझा करना और क्षमता निर्माण की पहल इसके उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण रहेगी।
गोयल ने कहा कि भारत ने एक मजबूत भ्रष्टाचार विरोधी व्यवस्था स्थापित की है और भ्रष्टाचार से निपटने तथा कर पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए पहले ही कई विधायी, प्रशासनिक और नियामकीय उपायों को लागू किया है।
मंत्रालय ने कहा कि स्वच्छ और निष्पक्ष अर्थव्यवस्था पर 14 सदस्यीय आईपीईएफ ब्लॉक के दो समझौते अक्टूबर से लागू होंगे।
इन समझौतों पर भारत ने 22 सितंबर को हस्ताक्षर किए थे।
भाषा अनुराग