न्यायालय ने नगालैंड अभियान को लेकर 30 सैन्य अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही बंद की
गोला नरेश
- 17 Sep 2024, 03:36 PM
- Updated: 03:36 PM
नयी दिल्ली, 17 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने नगालैंड के मोन जिले में उग्रवादियों पर हमले के एक विफल अभियान में 13 नागरिकों की हत्या के आरोपी 30 सैन्य कर्मियों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही मंगलवार को बंद कर दी।
न्यायालय ने यह भी कहा कि अगर केंद्र उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी देता है तो मामले को उसके तार्किक अंत तक ले जाया जा सकता है।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति पी बी वराले की पीठ ने यह भी कहा कि यह आदेश सेना को कर्मियों के खिलाफ कोई भी अनुशासनात्मक कार्रवाई करने से नहीं रोकेगा।
नगालैंड सरकार ने अलग मुकदमे में सैन्य कर्मियों पर मुकदमा चलाने की मंजूरी न दिए जाने को चुनौती दी है।
उच्चतम न्यायालय ने सैन्य कर्मियों की पत्नियों द्वारा दायर दो अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई बंद कर दी। इनमें से एक सैन्य कर्मी मेजर रैंक का अधिकारी है जिसने नगालैंड पुलिस द्वारा दर्ज मामले को बंद करने का अनुरोध किया था।
सैन्यकर्मियों की पत्नियां इस आधार पर आपराधिक कार्यवाही बंद करने का अनुरोध कर रही थी कि राज्य सरकार के पास कर्मियों को सशस्त्र बल विशेष शक्तियां अधिनियम (अफस्पा) के तहत मिली छूट के कारण उन पर मुकदमा चलाने का कोई अधिकार नहीं है।
उनकी याचिका में दलील दी गयी है कि अगर इलाका अफस्पा के तहत आता है तो सैन्य कर्मियों के खिलाफ कोई भी कानूनी कार्यवाही शुरू करने के लिए केंद्र से पूर्व अनुमति लेने की आवश्यकता होती है।
पिछले साल अप्रैल में केंद्र सरकार ने नगालैंड में मोन जिले के ओटिंग में एक नाकाम अभियान में कथित तौर पर शामिल सैन्य कर्मियों पर मुकदमा चलाने की स्वीकृति देने से इनकार कर दिया था।
राज्य सरकार ने एक अलग याचिका दायर कर 30 सैन्य कर्मियों पर मुकदमा चलाने की स्वीकृति देने से इनकार करने को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी थी। इस याचिका पर भारत के प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने नोटिस जारी किया है।
नगालैंड सरकार ने दलील दी है कि उसके पास एक मेजर समेत सैन्य कर्मियों के खिलाफ ठोस सबूत हैं और फिर भी केंद्र सरकार ने उन पर मुकदमा चलाने की स्वीकृति देने से मनमाने तरीके से इनकार कर दिया।
शीर्ष न्यायालय ने जुलाई 2022 में सैन्य कर्मियों की पत्नियों की याचिकाओं पर विशेष बल के इन कर्मियों पर मुकदमे की सुनवाई पर रोक लगा दी थी। पत्नियों ने दावा किया कि राज्य सरकार उनके पति पर अभियोग के लिए अनिवार्य स्वीकृति लिए बगैर ही मुकदमा चला रही है।
भाषा
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