नगा छात्रों ने राज्य सरकार से 14 दिन के भीतर तीन जिलों में इनर लाइन परमिट लागू करने की मांग की
सुरभि नरेश
- 06 Sep 2024, 12:28 PM
- Updated: 12:28 PM
कोहिमा, छह सितंबर (भाषा) नगा स्टूडेंट्स फेडरेशन (एनएसएफ) ने राज्य सरकार से नगालैंड के तीन जिलों - दीमापुर, चुमौकेदिमा और निउलैंड में 14 दिन के भीतर इनर लाइन परमिट (आईएलपी) लागू करने की मांग की है।
फेडरेशन ने इस बात पर नाराजगी जताई कि राज्य सरकार को कई बार इस बारे में प्रतिवेदन देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। एनएसएफ अध्यक्ष मेदोवी री और सहायक महासचिव केनिलो केंट ने बृहस्पतिवार को जारी एक बयान में कहा कि आखिरी बार 28 फरवरी को प्रतिवेदन दिया गया था लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
बांग्लादेश में बिगड़ते हालात के मद्देनजर एनएसएफ ने यह मांग की है और इसे ‘गंभीर चिंता का विषय’ बताया है। एनएसएफ ने कहा कि बांग्लादेश में संकट के कारण क्षेत्रीय अशांति पैदा हो गई है और इससे नगा होमलैंड को खतरा हो सकता है।
उन्होंने कहा, ‘‘जनसांख्यिकीय आंकड़ों में जो बदलाव हम देख रहे हैं वह सिर्फ तालिका में महज एक संख्या नहीं है, बल्कि यह नगा संस्कृति, जीवन जीने के हमारे तरीके और मूल जातीय पहचान के तौर पर हमारे भविष्य को लेकर खतरा है।’’
एनएसएफ ने कहा कि हम हाथ पर हाथ धरे बैठे नहीं रह सकते हैं क्योंकि हमारी मातृभूमि अवैध अप्रवासियों की शरणस्थली बन गई है।
एनएसएफ ने कहा कि आईएलपी को लागू करने में किसी भी प्रकार की देरी को नगा लोगों की सुरक्षा में सरकार की विफलता और कर्तव्यों की लापरवाही के रूप में देखा जाएगा।
एनएसएफ ने कहा कि नगा क्षेत्र को निश्चित रूप से किसी भी कीमत पर अवैध अप्रवासियों से सुरक्षित रखा जाना चाहिए और स्थिति की करीब से निगरानी जारी की जानी चाहिए। एनएसएफ ने कहा कि अगर सरकार तीनों जिलों में आईएलपी लागू करने में विफल रहती है तो वह कोई भी कार्रवाई करने के लिए तैयार है।
नगालैंड में 1873 के बंगाल पूर्वी सीमांत विनियमन (बीईएफआर) अधिनियम के तहत गैर-नगाओं का प्रवेश वर्जित है। इसका लक्ष्य मूल जातीय लोगों की पहचान एवं अस्तित्व की रक्षा करना है।
विनियमन के अनुसार जो कोई भी नगालैंड का मूल जातीय निवासी नहीं है उसे सीमित अवधि तक राज्य में प्रवेश के लिए नगालैंड सरकार से इनर लाइन परमिट (आईएलपी) लेना होता है।
आईएलपी दीमापुर जिले में लागू नहीं है, जिसे 2021 में तीन जिलों – दीमापुर, चुमौकेदिमा और निउलैंड में विभाजित किया गया था।
दीमापुर और निउलैंड जिले असम के साथ अंतरराज्यीय सीमा साझा करते हैं।
भाषा सुरभि