वायनाड भूस्खलन के एक माह बाद भी वहां केवल एक डाकघर, विशेष पुलिस चौकी और गश्ती दल ही नजर आता है
प्रीति सुरेश
- 30 Aug 2024, 03:06 PM
- Updated: 03:06 PM
(नीलाभ श्रीवास्तव)
वायनाड, 30 अगस्त (भाषा) केरल में वायनाड जिले के तीन गांवों में एक महीने पहले हुए भूस्खलन के बाद अब वहां केवल एक डाकघर, सेल्फी लेने वाले पर्यटकों को रोकने के लिए एक विशेष पुलिस चौकी और वीरान पड़े घरों में चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगाने के वास्ते गश्ती दल ही नजर आता है। इन डाकघरों में मृतकों और लापता हुए लोगों के पार्सल बिखरे पड़े है।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वायनाड के पुंचरीमट्टम, चूरलमाला और मुंडक्कई गांवों के आठ किलोमीटर के दायरे में 30 जुलाई को तड़के भीषण भूस्खलन हुआ, जिसमें 231 से अधिक लोगों की मौत हो गई, जबकि विभिन्न मानव शरीर के 218 अंग बरामद हुए।
केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम से 470 किलोमीटर दूर वायनाड के पहाड़ी जिले के इन सुरम्य गांवों की ओर जाने वाला केरल राज्य राजमार्ग संख्या 39 इस हृदय विदारक त्रासदी का गवाह है, क्योंकि लगातार हो रही बारिश के बावजूद इस मार्ग पर किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पुलिस वाहन, मिट्टी हटाने वाले भारी वाहन, एम्बुलेंस और बचाव दल कतारबद्ध रहे हैं।
केरल के इन तीन गांवों में भूस्खलन के बाद कई मकान क्षतिग्रस्त हो गए तो कुछ ढह गए, लेकिन जो कुछ मकान सही-सलामत हैं, वे भी अभी वीरान पड़े हैं, क्योंकि सरकारी अधिकारियों ने यहां रहने वाले लोगों को आश्रय स्थलों और किराये के मकानों में स्थानांतरित कर दिया है, जबकि कुछ लोग अपने रिश्तेदारों के घर चले गए हैं।
क्षेत्र में तैनात एक सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि कभी-कभी कुछ निवासी अपने घरों को इस उम्मीद के साथ देखने के लिए आते हैं कि प्राकृतिक आपदा के बाद मलबे में दबा उनका समान शायद मिल जाए। उन्होंने बताया कि भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में 10 दिन तक चला बचाव अभियान अब समाप्त हो गया है और अब अधिक लोगों के जीवित बचे होने की संभावना नगण्य है।
चूरलमाला स्थित वेल्लारमाला डाकघर की प्रभारी पोस्टमास्टर जी. शालिनी पार्सल और पैकेट के ढेर को देखती रहती हैं, क्योंकि सात अगस्त को डाकघर में सेवाएं फिर से शुरू हो गईं थी, लेकिन इसके बावजूद वे इन सामानों को वितरित नहीं कर पा रही हैं।
स्थानीय डाकिया के. मणिकंदन ने बृहस्पतिवार को 'पीटीआई-भाषा' को एक पार्सल दिखाया। यह पार्सल अजवड़ क्षेत्र में रहने वाले एक व्यक्ति के नाम पर था, लेकिन वह अब इसे कभी भी उस व्यक्ति को नहीं दे पाएंगे।
उन्होंने कहा, "यह व्यक्ति मर चुका है। तीस जुलाई को हुए भूस्खलन में उसकी मौत हो गई थी। मैं उसे जानता था। इस डाकघर में ऐसे कई पार्सल पड़े हुए, जिन्हें हम पहुंचा नहीं पाए हैं, क्योंकि जिनके नाम ये पार्सल हैं वे या तो मर चुके हैं या लापता हैं।''
वायनाड के तीनों गांवों में रहने वाले लोगों के मलबे से सने घर, स्कूल और अन्य इमारतें तबाही की साफ तस्वीर पेश करती हैं, जहां घरों के शयनकक्ष तक मलबा फैला हुआ है, बाइक और चार पहिया वाहन कीचड़ में दबे हुए हैं। इसके अलावा बर्तन, सोफा, कुर्सियां, मेज, खिलौने, स्कूल बैग, कपड़े, टूथब्रश हर जगह बिखरे पड़े हैं।
केरल पुलिस की एक इकाई 'मालाबार स्पेशल पुलिस' स्थानीय पुलिसकर्मियों के साथ मिलकर इन गांवों में किसी भी अपराध को रोकने के लिए पैदल गश्त करती हैं।
'मालाबार स्पेशल पुलिस' की एक टुकड़ी को इन क्षेत्रों में कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी दी गई है।
अधिकारियों ने बताया कि स्थानीय लोगों ने चोरी की कुछ वारदातों की शिकायत दर्ज कराई है।
घटनास्थल पर मौजूद एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि एक बार मलबे के नीचे से चार लाख रुपये की नकदी बरामद की गई थी। इसलिए, पुलिस की टीम इलाके में गश्त करती रहती हैं।
भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र के प्रवेश द्वार पर कम से कम चार पुलिस चौकियां स्थापित की गई हैं, ताकि सेल्फी लेने वाले ऐसे पर्यटक और लोगों को रोका जा सके जो इस भयावह आपदा की एक झलक अपने फोन में कैद करना चाहते हैं।
पुलिस निरीक्षक एम. रजितकुमार ने कहा, ‘‘केवल यहां रहने वाले लोगों को ही प्रवेश की अनुमति है, ताकि वे अपने घरों को देख सकें। पर्यटकों और अन्य आम लोगों को इस क्षेत्र में जाने की अनुमति नहीं है।’’
भाषा
प्रीति