मनमोहन ने तिवारी से कहा था: मीडिया को लेकर सरकार का दृष्टिकोण टकराव का नहीं, संवाद का होना चाहिए
हक हक मनीषा
- 29 Aug 2024, 05:04 PM
- Updated: 05:04 PM
नयी दिल्ली, 29 अगस्त (भाषा) प्रधानमंत्री रहते हुए मनमोहन सिंह ने अपनी सरकार में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय संभालने वाले मनीष तिवारी से कहा था कि मीडिया के प्रति सरकार का दृष्टिकोण टकराव का नहीं, बल्कि संवाद का होना चाहिए।
तिवारी ने ‘पीटीआई’ के विशेष कार्यक्रम ‘@4पार्लियामेंट स्ट्रीट’ में समाचार एजेंसी के संपादकों के साथ बातचीत के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री के साथ अपनी बातचीत का यह किस्सा बयां किया।
पूर्व सूचना एवं प्रसारण मंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि मीडिया से संबंधित समस्याओं को दूर करने के लिए जरूरी है कि इसके राजस्व मॉडल को दुरुस्त किया जाए और इसका समाधान प्रसारण सेवा (विनियमन) विधेयक, 2024 जैसे कदमों से नहीं हो सकता।
अक्टूबर, 2012 से मई, 2014 तक सूचना एवं प्रसारण मंत्री रहे तिवारी ने बताया कि उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री से पूछा था कि मीडिया के प्रति सरकार का दृष्टिकोण क्या होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि उस दौर में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार ‘‘सबसे भयानक, गैरजिम्मेदार और दुर्भावनापूर्ण’’ मीडिया कवरेज का सामना कर रही थी।
तिवारी के अनुसार, ‘‘मैंने उनसे (मनमोहन सिंह से) पूछा कि मीडिया के प्रति हमारा दृष्टिकोण क्या होना चाहिए? तब उन्होंने कहा था कि टकराव का नहीं, संवाद का दृष्टिकोण होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा था कि अगर आप खुद को विपक्ष की जगह पर रखें और मान लें कि जबरदस्ती करना आज का चलन बन गया है, तो आपको कैसा महसूस होगा।’’
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘मैंने पिछले 10 वर्षों में इस कथन पर विस्तार से विचार किया है और मैं केवल एक ही निष्कर्ष पर पहुंचा हूं कि संतुलन बनाए रखने में सक्षम होने के लिए आपके पास स्वाभाविक रूप से लोकतांत्रिक स्वभाव होना चाहिए, भले ही आप कुछ भी झेल रहे हों।’’
प्रस्तावित प्रसारण सेवा विधेयक के बारे में पूछे जाने पर तिवारी ने कहा कि विसंगतियों को ठीक करने के नाम पर बोलने की आजादी पर अंकुश लगा देना समाधान नहीं है, क्योंकि असली समस्या कहीं और है।
उन्होंने कहा, ‘‘10 साल बीत गए, लेकिन सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में मैंने जो समय बिताया, उससे मुझे मीडिया को करीब से देखने का मौका मिला। मेरा मानना है कि मौजूदा समस्या का समाधान प्रसारण विधेयक नहीं है।’’
तिवारी ने कहा, ‘‘जब प्रियरंजन दासमुंशी सूचना एवं प्रसारण मंत्री थे, तब एक प्रसारण सेवा विनियमन विधेयक लाया गया था। सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि मीडिया के राजस्व मॉडल पूरी तरह से त्रुटिपूर्ण हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘जब तक आप उन राजस्व मॉडल को ठीक नहीं कर लेते, तब तक आप सामने वाली समस्या को ठीक नहीं कर सकते।’’
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