यदि मुकेश ने अपराध किया है तो उन्हें विधायक बने रहने का अधिकार नहीं: के के शैलजा
सिम्मी मनीषा
- 29 Aug 2024, 02:50 PM
- Updated: 02:50 PM
तिरुवनंतपुरम, 29 अगस्त (भाषा) मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री के. के. शैलजा ने बृहस्पतिवार को कहा कि यदि यह साबित हो जाता है कि पार्टी विधायक एम. मुकेश पर लगाए गए आरोप सही हैं तो उन्हें विधायक के पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।
शैलजा ने कहा कि न्यायमूर्ति हेमा समिति की रिपोर्ट के मद्देनजर वर्तमान में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) मुकेश के खिलाफ लगे आरोपों सहित अन्य मामलों में लगाए गए सभी आरोपों की जांच कर रहा है।
उन्होंने कहा कि एसआईटी के अपनी रिपोर्ट देने के बाद सरकार इस मामले में उचित कार्रवाई करेगी।
उन्होंने कहा, ‘‘यदि उन्होंने कोई अपराध किया है, तो वह अपने पद पर बने रहने के योग्य नहीं हैं, लेकिन अभी हम जांच के शुरुआती चरण में हैं और हम यह नहीं कह सकते कि उन्हें इस्तीफा देना चाहिए या नहीं।’’
शैलजा ने कहा कि सरकार किसी भी ऐसे व्यक्ति को बचाने की कोशिश नहीं करेगी जो अपराधी पाया जाता है और वह किसी के मामले में पक्षपाती नहीं है।
राज्य की पूर्व स्वास्थ्य मंत्री शैलजा ने कहा कि कांग्रेस के कुछ विधायक भी इसी तरह के आरोपों का सामना कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया है।
शैलजा ने साथ ही कहा कि वह यह नहीं कहेंगी कि इस मामले में भी यही रुख होना चाहिए।
केरल में सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) के संयोजक ई पी जयराजन ने बलात्कार के एक मामले में आरोपी मुकेश का समर्थन करते हुए कहा कि मलयालम अभिनेता का इस्तीफा मांगने से पहले यौन उत्पीड़न के मामलों में आरोपी दो कांग्रेस विधायकों को इस्तीफा देना चाहिए।
शैलजा ने कहा कि सरकार महिलाओं और पीड़ितों के साथ है क्योंकि उसी ने 2017 में न्यायमूर्ति हेमा समिति का गठन किया था और अब विभिन्न अभिनेताओं और निर्देशकों के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए एक एसआईटी का गठन किया है, जिसमें वरिष्ठ महिला आईपीएस (भारतीय पुलिस सेवा) अधिकारी शामिल हैं।
मुकेश पर एक अभिनेत्री ने आरोप लगाया है कि अभिनेता ने कई साल पहले उसका यौन उत्पीड़न किया था जिसके आधार पर यह मामला दर्ज किया गया।
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि बुधवार रात कोच्चि शहर के मरदु पुलिस थाने में अभिनेता के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (बलात्कार) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई।
उन्होंने बताया कि यह मामला भारतीय दंड संहिता के तहत इसलिए दर्ज किया गया है, क्योंकि कथित अपराध भारतीय न्याय संहिता के लागू होने से पहले हुआ था।
न्यायमूर्ति हेमा समिति की रिपोर्ट में किए गए खुलासों के बाद विभिन्न निर्देशकों और अभिनेताओं पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगे हैं।
इससे पहले, तिरुवनंतपुरम ‘म्यूजियम पुलिस’ ने आठ साल पहले एक होटल में एक अभिनेत्री से बलात्कार करने के आरोप में अभिनेता सिद्दीकी के खिलाफ बुधवार को मामला दर्ज किया था।
पहला मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 354 (महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से उस पर हमला करना या आपराधिक बल प्रयोग) के तहत निर्देशक रंजीत के खिलाफ पश्चिम बंगाल की एक अभिनेत्री की शिकायत पर दर्ज किया गया था। यह शिकायत 2009 की एक घटना के संबंध में की गई है।
अभिनेत्री ने आरोप लगाया है कि निर्देशक ने 2009 में फिल्म ‘पालेरी मणिक्यम’ में अभिनय के लिए आमंत्रित करने के बाद उसे अनुचित तरीके से छुआ था।
इन आरोपों को लेकर रंजीत ने केरल चलचित्र अकादमी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। सिद्दीकी ने भी अपने खिलाफ लगे आरोपों के बाद ‘मलयालम मूवी आर्टिस्ट एसोसिएशन’ (एएमएमए) के महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया था।
वर्ष 2017 में एक अभिनेत्री पर हमले के बाद केरल सरकार द्वारा गठित न्यायमूर्ति हेमा समिति की रिपोर्ट में मलयालम फिल्म उद्योग में महिलाओं के उत्पीड़न एवं शोषण के मामलों का खुलासा किया गया है।
भाषा
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