सेना प्रमुख का मणिपुर दौरा दर्शाता है कि केंद्र शांति बहाली के लिए उत्सुक है: बीरेन सिंह
सुरेश दिलीप
- 24 Aug 2024, 07:33 PM
- Updated: 07:33 PM
इम्फाल, 24 अगस्त (भाषा) मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने शनिवार को कहा कि सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी का दौरा दर्शाता है कि केंद्र इस पूर्वोत्तर राज्य में जातीय हिंसा को लेकर चिंतित है और शांति बहाली को लेकर उत्सुक है।
सिंह ने यह भी कहा कि सेना प्रमुख ने एक महत्वपूर्ण मोड़ पर मणिपुर का दौरा किया है।
उन्होंने यहां मुख्यमंत्री सचिवालय में मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा, ‘‘सेना प्रमुख तीन या चार कमांडरों के साथ आए थे, जिनमें पूर्वी कमान के कमांडर भी शामिल थे। हमने कई मुद्दों पर विचार-विमर्श किया और उनका मुख्य उद्देश्य राज्य में जल्द से जल्द शांति बहाल करना था। उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों के मुद्दों और पड़ोसी देश में संकट पर भी चर्चा की।’’
सेना के एक बयान में कहा गया कि जनरल द्विवेदी ने मणिपुर में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की।
उन्होंने क्षेत्र में शांति और सद्भाव बनाए रखने की दिशा में भारतीय सेना और असम राइफल्स के प्रयासों की सराहना की।
सिंह ने कहा, ‘‘राज्य के महत्वपूर्ण मोड़ पर उनका दौरा दर्शाता है कि मणिपुर संकट को लेकर केंद्र चिंतित है और शांति बहाल करने के लिए उत्सुक है। सेना प्रमुख ने कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को मणिपुर सरकार के साथ उचित चर्चा के बाद कार्रवाई करने का निर्देश (भी) दिया।’’
कार्रवाई के निलंबन (एसओओ) के लिए केंद्र, मणिपुर सरकार और कुकी उग्रवादी संगठनों के बीच समझौते पर सिंह ने कहा, ‘‘इस बारे में केंद्र की ओर से कोई ठोस निर्देश नहीं दिया गया है।’’
मुख्यमंत्री ने पहले विधानसभा को सूचित किया था कि राज्य मंत्रिमंडल ने उग्रवादी समूहों की अवांछित गतिविधियों को देखने के बाद मार्च 2023 में समझौते से हाथ खींचने का फैसला किया था और इस साल 29 फरवरी से समझौते को आगे नहीं बढ़ाया गया।
एसओओ समझौते पर केंद्र, मणिपुर सरकार और कुकी उग्रवादी संगठनों के दो समूहों- कुकी नेशनल ऑर्गनाइजेशन (केएनओ) और यूनाइटेड पीपुल्स फ्रंट (यूपीएफ) ने हस्ताक्षर किए थे।
इस समझौते पर 2008 में हस्ताक्षर किए गए थे और उसके बाद समय-समय पर इसे बढ़ाया गया।
एसओओ समझौते के हिस्से के रूप में, केंद्र और राज्य सरकार की एजेंसियों, केएनओ और यूपीएफ के प्रतिनिधियों से मिलकर एक संयुक्त निगरानी समूह (जेएमजी) का गठन किया गया था, जो बुनियादी नियमों के पालन की निगरानी करता था।
भाषा सुरेश