पायलट बाबा की पार्थिव देह कनखल आश्रम लायी गयी, बृहस्पतिवार को दी जाएगी महासमाधि
राजकुमार
- 21 Aug 2024, 10:23 PM
- Updated: 10:23 PM
हरिद्वार, 21 अगस्त (भाषा) महामंडलेश्वर सोमनाथ गिरी उर्फ़ पायलट बाबा का पार्थिव शरीर बुधवार शाम को मुंबई से यहां उनके कनखल स्थित आश्रम में लाया गया जहां उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए उनके भक्तों तथा साधु-संतों की भीड़ उमड़ पड़ी।
श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े के वरिष्ठतम महामंडलेश्वर पायलट बाबा मंगलवार को मुंबई के एक अस्पताल में ब्रहमलीन हो गए थे जिससे जूना अखाड़ा समेत पूरे संत समाज में शोक की लहर दौड़ गयी।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी उनके निधन पर शोक व्यक्त किया। मुख्यमंत्री की ओर से हरिद्वार के जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने पायलट बाबा को श्रद्धांजलि अर्पित की।
बाबा को श्रद्धांजलि देने वालों में श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक एवं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि महाराज, जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमहंत प्रेम गिरि महाराज, दिल्ली संत महामंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं हिंदू यूनाइटेड फ्रंट के अध्यक्ष श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज, जूना अखाड़ा के राष्ट्रीय सचिव श्रीमहंत महेशपुरी, सचिव श्रीमहंत शैलेंद्र गिरि महाराज, सचिव सहजानंद गिरी महाराज, थानापति धर्मेंद्र गिरी महाराज, साध्वी चेतनानंद गिरी महाराज, साध्वी श्रद्धा गिरी महाराज समेत जूना अखाड़ा के महंत, श्रीमहंत, महामंडलेश्वर समेत हजारों साधु-संतों एवं भक्त शामिल थे ।
श्री महंत नारायण गिरी महाराज ने बताया कि श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े के राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि महाराज के दिशा-निर्देशन में बृहस्पतिवार को अभिजीत मुहूर्त में दोपहर 11 बजकर 55 मिनट पर पायलट बाबा को महासमाधि दी जाएगी।
उन्होंने बताया कि बृहस्पतिवार को बाबा का धूल लौट यानि तीए का आयोजन भी होगा जिसमें देश भर से साधु-संत एवं भक्त भाग लेंगे।
पायलट बाबा के ब्रहमलीन होने से दुखी जूना अखाड़े में तीन दिन का शोक मनाया जा रहा है और अखाड़े की सभी शाखाओं, आश्रमों और मुख्य पीठों में गीता पाठ, शांति पाठ एवं हवन का आयोजन किया जा रहा है।
श्री महंत हरि गिरी ने बताया कि पायलट बाबा एक सच्चे योगी एवं सनातन संस्कृति के प्रहरी थे।
उन्होंने बताया कि संन्यासी बनने से पूर्व पायलट बाबा भारतीय वायुसेना में पायलट थे और उन्होंने 1962, 1965, 1971 के युद्ध में भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर के पद पर रह कर भारत मां की सेवा की थी ।
वर्ष 1974 में उन्होंने विधि विधान से संन्यास ले लिया और सनातन संस्कृति का प्रचार-प्रसार शुरू कर दिया ।
भाषा सं दीप्ति