पता लगाएं कि घोघा डेरी में दूध संग्रहण केंद्र स्थापित करने में अमूल या मदर डेरी को शामिल किया जा सकता है : अदालत
राजकुमार दिलीप
- 20 Aug 2024, 08:49 PM
- Updated: 08:49 PM
नयी दिल्ली, 20 अगस्त (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के आयुक्त को निर्देश दिया है कि वह इस बात की पड़ताल करें कि क्या अमूल या मदर डेरी जैसी सहकारी संस्था को घोघा डेरी में संग्रहण केंद्र स्थापित करने में शामिल किया जा सकता है, ताकि डेरी मालिकों को उनके दूध के लिए तैयार उपभोक्ता मिल सके।
उच्च न्यायालय ने हाल में शहर के अधिकारियों को भलस्वा डेरी से अपना धंधा घोघा डेरी ले जाने के इच्छुक लोगों के लिए शीघ्र भूखंड आवंटित करने के संबंध में एक योजना उसके सामने पेश करने को कहा था।
उच्च न्यायालय में एमसीडी के वकील ने उत्तर-पश्चिमी दिल्ली के घोघा डेरी के लिये ‘मास्टर प्लान’ दिखाया।
वकील ने कहा कि हर भूखंड के लिए ‘लेआउट प्लान’ दिल्ली नगर निगम के सदन को सौंपने के लिए तैयार किया जा रहा है तथा 25 अगस्त तक अदालत में अंतिम योजना पेश की जाएगी।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन और न्यायमूर्ति पी एस अरोड़ा की पीठ ने कहा, ‘‘प्रस्तावित मास्टर प्लान में चारागाह क्षेत्र का सीमांकन नहीं किया गया है, साथ ही सहकारी समिति के लिए भी क्षेत्र निर्धारित नहीं किया गया है, जिससे रोजाना दूध का संग्रहण हो पाता।’’
पीठ ने कहा, ‘‘एमसीडी आयुक्त को इस बात की पड़ताल करने का निर्देश दिया जाता है कि क्या अमूल या मदर डेरी जैसी किसी सहकारी संस्था या अन्य संगठन को घोघा डेरी में संग्रहण केंद्र स्थापित करने में शामिल किया जा सकता है, ताकि डेरी मालिकों को अपने उत्पाद के लिए तैयार उपभोक्ता मिल सके, क्योंकि इससे डेरी कॉलोनी आत्मनिर्भर बन सकेगी।’’
उच्च न्यायालय उन अन्य आवेदनों पर भी सुनवाई कर रहा था, जिन्हें भलस्वा डेरी कॉलोनी का बाशिंदा होने का दावा करते हुए लोगों ने दायर किया है। इन लोगों ने यह कहते हुए हुए एमसीडी के तोड़फोड़ या सीलिंग संबंधी निर्देश को चुनौती दी है कि इससे वे बेघर हो जायेंगे।
ये आवेदन दिल्ली में नौ नामित डेरी कॉलोनी - ककरौला डेरी, गोयला डेरी, नंगली शकरावती डेरी, झरोदा डेरी, भलस्वा डेरी, गाजीपुर डेरी, शाहबाद दौलतपुर डेरी, मदनपुर खादर डेरी और मसूदपुर डेरी- की खराब स्थिति से संबंधित एक लंबित याचिका के सिलसिले में दायर किए गए थे।
उच्च न्यायालय ने कहा कि आवेदनों से ऐसा लगता है कि वर्तमान याचिका के केंद्रबिंदु और इस अदालत की मंशा को कई लोग समझ नहीं पाये हैं।
पीठ ने स्पष्ट किया कि यह याचिका दिल्ली की अगली पीढ़ी के स्वास्थ्य और कल्याण तथा उसके नागरिकों के भोजन चक्र से संबंधित है।
भाषा राजकुमार