पूर्वोत्तर में सुरक्षा चिंता का विषय, बांग्लादेश में सत्तारूढ़ लोगों से वार्ता की जरूरत: विचार समूह
सुभाष माधव
- 19 Aug 2024, 05:08 PM
- Updated: 05:08 PM
गुवाहाटी, 19 अगस्त (भाषा) पूर्व विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने कहा है कि भारत को बांग्लादेश में सत्ता में मौजूद लोगों के साथ बातचीत करने की जरूरत है, क्योंकि पड़ोसी देश में अस्थिरता का पूर्वोत्तर क्षेत्र के सुरक्षा परिदृश्य पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
श्रृंगला ने यह बात एक कार्यक्रम में कही, जिसमें बांग्लादेश की वर्तमान स्थिति से निपटने में भारत के लिए नीतिगत विकल्पों पर एक रिपोर्ट जारी की गई।
केंद्र को सौंपी जाने वाली यह रिपोर्ट विचार समूह ‘सोसाइटी टू हार्मोनाइज एस्पिरेशंस फॉर रिस्पॉन्सिबल एंगेजमेंट’ (शेयर) द्वारा तैयार की गई है।
विचार समूह के सदस्य सुरक्षा और रक्षा विशेषज्ञ हैं। उन्होंने कार्यक्रम में कहा कि बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता का सीधा प्रभाव पूर्वोत्तर भारत में सुरक्षा और विकास परियोजनाओं, दोनों पर पड़ रहा है।
बांग्लादेश में भारत के राजदूत रह चुके श्रृंगला ने कहा ‘‘भारत को बांग्लादेश में सत्ता में मौजूद लोगों या सत्ता के पीछे मौजूद लोगों के साथ बातचीत करनी होगी, क्योंकि पड़ोस में स्थिरता का पूर्वोत्तर भारत के सुरक्षा परिदृश्य पर सीधा प्रभाव पड़ता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमारी दो मुख्य चिंताएं हैं - बांग्लादेश की भूमि का इस्तेमाल किसी भी तरह से इसके (भारत के) हितों के प्रतिकूल नहीं किया जाना चाहिए और पड़ोसी देश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना।’’
श्रृंगला ने यह भी कहा कि इस रिपोर्ट की सिफारिशें तीन प्रमुख तथ्यों पर आधारित हैं - इस बारे में अनिश्चितता है कि वर्तमान में बांग्लादेश में नीति निर्माण के लिए कौन जिम्मेदार है, पड़ोसी देश में भारत विरोधी भावनाएं स्पष्ट हैं, और वहां आर्थिक स्थिरता और रोजगार सृजन।
पूर्वी कमान के पूर्व ‘जीओसी-इन-सी’ लेफ्टिनेंट जनरल आर पी कलिता (सेवानिवृत्त) ने कार्यक्रम में कहा कि यह रिपोर्ट कार्यान्वयन के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार को सौंपी जाएगी।
लद्दाख के पूर्व उपराज्यपाल आर के माथुर ने कहा कि यह सुनिश्चित करने पर ध्यान दिया गया है कि सिफारिशें ‘‘सभी वर्गों और विचारधाराओं के लिए कार्यान्वयन योग्य और स्वीकार्य हों।’’ क्योंकि पड़ोसी देश सामाजिक-राजनीतिक उथल-पुथल से गुजर रहा है।
पूर्व रक्षा सचिव ने कहा, ‘‘सिफारिशों को संक्षिप्त, मध्यम और दीर्घकालिक अवधि में विभाजित किया गया है ताकि भारत की ओर से नीति निर्माण के लिए एक चरणबद्ध दृष्टिकोण सुनिश्चित किया जा सके जो पारस्परिक रूप से स्वीकार्य हो।’’
असम के मुख्य सूचना आयुक्त भास्कर ज्योति महंत ने इन सिफारिशों का उल्लेख करते हुए कहा कि सभी हितधारकों के साथ बातचीत भारत के हित में है, विशेष रूप से पूर्वोत्तर में संभावित शरणार्थी संकट से निपटने के संबंध में, जिसकी बांग्लादेश के साथ 1,885 किलोमीटर लंबी सीमा लगी हुई है।
सरकारी नौकरियों में विवादास्पद कोटा प्रणाली के खिलाफ छात्रों के बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन के बाद, बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने पांच अगस्त को पद से इस्तीफा दे दिया और देश छोड़कर भारत आ गई थीं।
इसके बाद, नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस ने 8 अगस्त को बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार के रूप में शपथ ली।
भाषा सुभाष