इस्लामिक विद्वान ने केरल में डीवाईएफआई के ‘पोर्क चैलेंज’ की आलोचना की
शफीक प्रशांत
- 18 Aug 2024, 06:45 PM
- Updated: 06:45 PM
कोच्चि, 18 अगस्त (भाषा) केरल की एक प्रभावशाली मुस्लिम संस्था से जुड़े एक इस्लामी विद्वान ने रविवार को ‘डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया’ (डीवाईएफआई) द्वारा आयोजित ‘पोर्क चैलेंज’ (सुअर के मांस के सेवन की चुनौती) कार्यक्रम की आलोचना की।
डीवाईएफआई ने हाल में वायनाड में हुए भूस्खलन के बाद पुनर्वास प्रयासों में सरकार की मदद करने के लिए केरल में धन एकत्र करने के मद्देनजर आयोजित कार्यक्रमों के हिस्से के रूप में ‘पोर्क चैलेंज’ का आयोजन किया था।
‘समस्त केरल जमीयत-उल कुतबा समिति’ के एक प्रमुख नेता नसर फैजी कुडाथई ने केरल में सत्तारूढ़ माकपा की युवा इकाई डीवाईएफआई के इस कार्यक्रम की आलोचना करते हुए कहा कि वामपंथी संगठन ‘‘चैलेंज’’ के नाम पर ईशनिंदा करने की कोशिश कर रहा है।
डीवाईएफआई 30 जुलाई को वायनाड जिले में हुए विनाशकारी भूस्खलन के प्रभावित लोगों के पुनर्वास प्रयासों में मदद करने के लिए धन एकत्र करने के मद्देनजर आयोजित कार्यक्रमों के हिस्से के रूप में राज्य भर में कई चुनौतियों और उत्सवों का आयोजन कर रहा है। इसके तहत डीवाईएफआई ने रविवार को कोठमंगलम में ‘पोर्क चैलेंज’ का आयोजन किया।
डीवाईएफआई कोठमंगलम उत्तर स्थानीय समिति के सचिव रंजीत ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि यह चुनौती सफल रही और उन्होंने 375 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से 517 किलोग्राम सूअर का मांस बेचा है।
उन्होंने कहा, ‘‘हम वायनाड में प्रभावित लोगों के लिए धन जुटाने के वास्ते कई चुनौतियों और उत्सवों का आयोजन कर रहे हैं। यहां सूअर का मांस बेचने के नाम पर किसी ने कोई समस्या नहीं खड़ी की। यहां सूअर के मांस का बहुत बड़ा बाजार है और हमने इन सभी कारकों पर विचार करने के बाद यह चुनौती देने का फैसला किया है।’’
कुडाथई ने शनिवार को एक फेसबुक पोस्ट में दावा किया कि कई (भूस्खलन) प्रभावित लोग सूअर का मांस खाना वर्जित मानते हैं, लेकिन डीवाईएफआई इसे ऐसे लोगों को अपमानित करने के लिए एक चुनौती के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।
डीवाईएफआई के राज्य सचिव वी.के. सनोज ने रविवार को कुडाथई के बयान का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे लोग राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की एक और आवाज बन रहे हैं।
सनोज ने कहा, “केरल को यह बात समझनी चाहिए। क्या हमने किसी को पोर्क या गोमांस खरीदने के लिए मजबूर किया? वे सिर्फ पोर्क चैलेंज को लेकर ही क्यों चिंतित हैं? यह उनके सांप्रदायिक राजनीतिक एजेंडे के कारण है। केरल का समाज ऐसे सांप्रदायिक तत्वों को अच्छी तरह समझ लेगा।”
भाषा शफीक