भाजपा ने एमयूडीए ‘घोटाले’ की निष्पक्ष जांच के लिए सिद्धरमैया से इस्तीफा देने की मांग की
जोहेब नेत्रपाल
- 17 Aug 2024, 04:17 PM
- Updated: 04:17 PM
नयी दिल्ली, 17 अगस्त (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शनिवार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया से अपने पद से इस्तीफा देने की मांग की ताकि मैसूरु शहरी विकास प्राधिकरण (एमयूडीए) भूमि आवंटन “घोटाले” में उनकी भूमिका की निष्पक्ष जांच हो सके। पार्टी ने मामले में सिद्धरमैया के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति देने के राज्यपाल के निर्णय का स्वागत भी किया।
भाजपा सांसदों-संबित पात्रा और तेजस्वी सूर्या ने संवाददाता सम्मेलन में कांग्रेस का यह आरोप खारिज किया कि कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत का निर्णय राजनीति से प्रेरित है।
पात्रा ने दावा किया कि यह भ्रष्टाचार का एक गंभीर मामला है, जिसमें सिद्धरमैया और उनका परिवार संलिप्त है।
उन्होंने दावा किया कि पूरा ‘‘घोटाला’’ 4,000 करोड़ रुपये का है। उन्होंने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उसके नेता हजारों करोड़ रुपये से कम का कोई घोटाला नहीं करते।
वहीं, सूर्या ने कहा कि कर्नाटक सरकार ने भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए दो आयोग गठित किए हैं, जिनमें से एक की अगुवाई आईएएस अधिकारी जबकि दूसरे का नेतृत्व उच्च न्यायालय के एक पूर्व न्यायाधीश कर रहे हैं।
बेंगलोर दक्षिण लोकसभा सीट से भाजपा के सांसद सूर्या ने कहा कि यह अनियमितताओं की स्वीकारोक्ति है।
आरोप हैं कि सिद्धरमैया की पत्नी पार्वती को मैसूरु में प्रतिपूरक भूखंड आवंटित किया गया था जिसका संपत्ति मूल्य उनकी उस भूमि की तुलना में अधिक था जिसे एमयूडीए ने ‘अधिग्रहीत’ किया था।
एमयूडीए ने पार्वती को उनकी 3.16 एकड़ भूमि के बदले 50:50 अनुपात योजना के तहत भूखंड आवंटित किए थे।
सूर्या ने कथित घोटाले का विवरण देते हुए दावा किया कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री की पत्नी को ग्रामीण भूमि के एक हिस्से के मुआवजे के रूप में मैसूरु में 14 प्रमुख कीमती भूखंड आवंटित किए गए थे।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण भूमि पहले उनके दामाद ने मूल मालिक से खरीदी और फिर पार्वती को उपहार स्वरूप दे दी थी।
सूर्या ने दावा किया कि जब भूमि से संबंधित निर्णय लिए गए थे तब सिद्धरमैया पहले उपमुख्यमंत्री थे और फिर मुख्यमंत्री थे, जबकि उनका बेटा मैसूरु निकाय का सदस्य था जिसने आवंटन किया था।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के मातहत काम करने वाली राज्य की किसी भी जांच एजेंसी द्वारा मामले की निष्पक्ष जांच किए जाने की संभावना नहीं है, लिहाजा सिद्धरमैया को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।
भाषा जोहेब