हर घर तिरंगा अभियान के लिए राष्ट्रध्वज की मांग से महिला स्वयं सहायता समूह फूलता-फलता उद्योग बना
राजकुमार माधव
- 14 Aug 2024, 08:28 PM
- Updated: 08:28 PM
नयी दिल्ली, 14 अगस्त (भाषा) संस्कृति मंत्रालय ने कहा है कि 2022 में शुरू किये गये ‘हर घर तिरंगा अभियान’ ने स्वंय सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा किये हैं क्योंकि उन्होंने भारी मांग को पूरा करने के लिए तिरंगा निर्माण का काम बड़ी मात्रा में अपने हाथों में लिया।
केंद्रीय संस्कृति सचिव गोविंद मोहन ने बताया कि सलाना करीब 25 करोड़ ध्वज की जरूरत होती है तथा झंडा निर्माण का काम बड़े ठेकेदारों से स्वयं सहायता समूहों के पास चला गया, फलस्वरूप यह एक फलता-फूलता उद्योग बन गया है, क्योंकि अब अधिकतर राष्ट्र ध्वजों का निर्माण और बिक्री स्वयं सहायता समूहों द्वारा ही की जाती है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की परिकल्पना ‘आजादी के अमृत महोत्सव’ के तहत जब यह कार्यक्रम पहली बार शुरू किया गया तब झंडों की मांग को पूरा करने की बड़ी चुनौती थी।
उन्होंने एक बयान में कहा कि इसका समाधान करने के लिए सरकार ने बड़े विनिर्माताओं/ठेकेदारों से राष्ट्रध्वज खरीदे और सीधे या डाक कार्यालयों के माध्यम से राज्यों को करीब साढ़े सात करोड़ ध्वज वितरित किये।
मोहन ने बताया कि इसी के साथ सरकर ने भारत ध्वज संहिता में भी संशोधन किया ताकि ध्वज निर्माण में स्वयं सहायता समूहों समेत कई अन्य पक्ष भी शामिल हो पायें।
उन्होंने कहा, ‘‘ दूसरे वर्ष तक, केंद्र सरकार द्वारा आपूर्ति किए गए राष्ट्र ध्वजों की मांग में काफी गिरावट आई और यह लगभग 2.5 करोड़ रह गई, क्योंकि महिला स्वयं सहायता समूहों ने झंडों को बनाने का काम तेजी से अपने हाथ में ले लिया। इसका एक उल्लेखनीय उदाहरण उत्तर प्रदेश है, जिसने 2022 में सरकार से 4.5 करोड़ झंडे खरीदे थे, लेकिन 2023 में उसने एक भी तिरंगा नहीं खरीदा, ऐसा झंडा उत्पादन में अपने स्वयं सहायता समूहों की आत्मनिर्भरता के कारण संभव हुआ।’’
उन्होंने कहा कि 2024 में केंद्र सरकार द्वारा आपूर्ति किए गए झंडों की मांग घटकर मात्र 20 लाख रह गयी, क्योंकि स्वयं सहायता समूह प्राथमिक उत्पादक बन गये।
उन्होंने कहा, ‘‘यह काम बड़े विक्रेताओं से एसएचजी के पास आने से ये समूह फूलते-फलते उद्योग में तब्दील हो गये। ये एसएचजी अब अधिकतर राष्ट्र ध्वज का उत्पादन और बिक्री करते हैं। प्रधानमंत्री मोदी के हर घर तिरंगा अभियान ने न केवल ‘जनभागीदारी’ सुनिश्चित की है, बल्कि देश भर में महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक अवसर भी पैदा किए हैं।’’
भाषा राजकुमार