महिलाओं ने कानून के पेशे में अपनी जगह बनाने के लिए लड़ाई लड़ी : सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता
पवनेश सुभाष दिलीप
- 09 Mar 2024, 10:31 PM
- Updated: 10:31 PM
नयी दिल्ली, नौ मार्च (भाषा) सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने यहां शनिवार को कहा कि महिलाएं, पुरुषों से बेहतर हैं और उन्हें आरक्षण जैसे प्रतीकात्मक कदम को स्वीकार नहीं करना चाहिए।
विधिक समुदाय में महिलाओं की भागीदारी से संबंधित एक कार्यक्रम में मेहता ने कहा कि न्यायाधीशों या वरिष्ठ अधिवक्ताओं के कुछ प्रतिशत पद महिलाओं के लिए आरक्षित करने को लेकर चर्चा हो रही है, लेकिन यह उनका सम्मान नहीं है।
उन्होंने कहा, ‘‘आपको प्रतीकात्मक कदम की जरूरत नहीं है, आप जिसकी हकदार हैं, उसकी हकदार हैं।’’
मेहता ने कहा, ‘‘अगर मेरे गुजराती होने के कारण मुझे कोई चीज मिलती है, क्योंकि किसी विशेष क्षेत्र में बहुत कम गुजराती हैं, तो यह मेरा अपमान है। यदि इस तरह की कोई चीज मुझे मिलती है तो यह मेरा सम्मान नहीं है। अगर मैं सक्षम हूं, तो मुझे यह अवश्य मिलना चाहिये, और महिलाएं सक्षम हैं।’’
सोसाइटी ऑफ इंडियन लॉ फर्म्स (एसआईएलएफ) और एसआईएलएफ लेडीज ग्रुप (एसएलजी) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि महिलाओं ने कानूनी पेशे में जगह बनाने के लिए लड़ाई लड़ी है।
मेहता ने कहा कि महिलाएं पहले से ही पुरुषों से आगे हैं और हमेशा आगे रही हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि जो महिलाएं पुरुषों के बराबर बनना चाहती हैं, उनमें महत्वाकांक्षा की कमी है। क्योंकि आप पहले से ही पुरुषों से आगे हैं। आपको खुद को कमतर क्यों दिखाना चाहिए और पुरुषों के बराबर होने का प्रयास करना चाहिए? आपको इसकी आवश्यकता नहीं है...।’’
विमानन उद्योग में किए गए एक अध्ययन का जिक्र करते हुए मेहता ने कहा कि इससे पता चला है कि विमान में कोई समस्या पैदा होने पर या अपहरण जैसे संकट से निपटने में महिला पायलट अधिक शांत, बेहतर धैर्यवान और कहीं अधिक परिपक्व हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘आंकड़ों के लिहाज से, अगर आप देश के शक्तिशाली नेतृत्व की बात करते हैं, तो जवाहरलाल नेहरू से लेकर सभी प्रधानमंत्रियों में से, केवल एक महिला प्रधानमंत्री थीं--इंदिरा गांधी। लेकिन आपातकाल के लिए एक ही काफी थीं।’’
उन्होंने कहा कि इजराइल में एक गोल्डा मेर ही काफी थीं और ब्रिटेन में एक मार्गरेट थैचर ही काफी थीं।
कानून के पेशे में महिलाओं के बारे में सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि कॉर्नेलिया सोराबजी ने बंबई उच्च न्यायालय में कानूनी लड़ाई लड़ी और वह भारतीय बार में वकील के रूप में पंजीकरण कराने वाली पहली भारतीय महिला थीं।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के हिस्से के रूप में दिन भर के इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।
भाषा पवनेश सुभाष