1971 ने सिखाया कि युद्ध केवल सैन्य मामला नहीं, बल्कि समग्र मामला है : पूर्व सेना प्रमुख
सिम्मी पारुल
- 12 Aug 2024, 09:55 AM
- Updated: 09:55 AM
नयी दिल्ली, 11 अगस्त (भाषा) पूर्व सेना प्रमुख जनरल (सेवानिवृत्त) वी एन शर्मा ने रविवार को कहा कि 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध का एक ‘‘बड़ा सबक’’ यह है कि युद्ध लड़ना केवल सैन्य मामला नहीं, बल्कि राजनीति और कूटनीति समेत विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ा एक ‘‘समग्र मामला’’ है।
जनरल (सेवानिवृत्त) शर्मा ने यहां ‘इंडिया इंटरनेशनल सेंटर’ में 22 वर्षीय सत्यजीत लाल की नयी पुस्तक ‘1971 स्ट्रेटेजी कैंपेन वैलर’ के विमोचन के अवसर यह बात कही। यह पुस्तक उस युद्ध के भारतीय नायकों के शौर्य की याद दिलाती है, जिसके कारण 1971 में एक नये राष्ट्र बांग्लादेश का जन्म हुआ और इसमें महत्वपूर्ण लड़ाइयों के मुख्य बिंदुओं का वर्णन किया गया है। इसका विमोचन भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वी आर चौधरी और दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल अनिल बैजल सहित अन्य गणमान्य हस्तियों की उपस्थिति में किया गया।
इस पुस्तक का विमोचन ऐसे समय में किया गया है, जब बांग्लादेश में सरकार विरोधी अप्रत्याशित प्रदर्शनों के कारण शेख हसीना ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है और देश में अंतरिम सरकार का गठन किया गया है।
विमोचन के अवसर पर 1971 के युद्ध में हिस्सा लेने वाले तीनों सेनाओं के कई पूर्व सैनिक भी मौजूद थे।
जनरल शर्मा 1988-1990 तक सेना प्रमुख रहे तथा 1971 का युद्ध लड़ने के समय वह कर्नल थे।
जनरल (सेवानिवृत्त) शर्मा ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए युद्ध से जुड़ी अपनी यादों का जिक्र किया और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की नेतृत्व क्षमता की सराहना करते हुए कहा, ‘‘उन्होंने बहुत अच्छा काम किया।’’
पूर्व सेना प्रमुख ने कहा, ‘‘युद्ध में केवल सेना ही नहीं, बल्कि पूरी सरकार, असैन्य सेवाएं, पुलिस सेवाएं, परिवहन एवं रेलवे, नौसेना, मर्चेंट नेवी, ये सभी प्रधानमंत्री के आदेश पर एकजुट होते हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘1971 के युद्ध का एक बड़ा सबक यह है कि यह (केवल) सैन्य मामला नहीं है। यह एक समग्र मामला है। यह राजनीतिक मामला है, कूटनीतिक मामला है और जब आप इन्हें मिला देते हैं, तो यह एक जबरदस्त ताकत बन जाता है।’’
भारतीय सशस्त्र बलों ने तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान की ‘मुक्ति वाहिनी’ के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ाई लड़ी, जिसके परिणामस्वरूप दिसंबर 1971 में पाकिस्तानी बलों के आत्मसमर्पण के साथ स्वतंत्र बांग्लादेश राष्ट्र का निर्माण हुआ।
बैजल ने अपने संबोधन में कहा कि 1971 में वह असम में लोक सेवक के रूप में तैनात थे और उन्हें तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान से राज्य में शरणार्थियों के आने की समस्या से निपटना पड़ा था।
सशस्त्र बलों के कई अन्य सेवानिवृत्त अधिकारियों ने भी इस युद्ध से जुड़ी यादें साझा कीं।
भाषा
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