दिल्ली के उपराज्यपाल को एमसीडी में ‘एल्डरमैन’ को नामित करने का अधिकार: उच्चम न्यायालय
जितेंद्र रंजन
- 06 Aug 2024, 08:34 PM
- Updated: 08:34 PM
नयी दिल्ली, छह अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने कहा कि दिल्ली के उपराज्यपाल को दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) में 10 ‘एल्डरमैन’ नामित करने का अधिकार है और वह मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह के लिए बाध्य नहीं हैं।
शीर्ष अदालत ने कहा कि संसद द्वारा पारित दिल्ली नगर निगम अधिनियम के तहत उपराज्यपाल को यह अधिकार है।
शीर्ष अदालत का यह ऐतिहासिक फैसला मंगलवार को वेबसाइट पर अपलोड किया गया। नगर निगम में ‘एल्डरमैन’ के नामांकन के संबंध में दिल्ली उपराज्यपाल की शक्ति के संबंध में यह फैसला सुनाया गया।
प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की पीठ ने कहा कि संसद द्वारा वर्ष 1993 में संशोधित दिल्ली नगर निगम (डीएमसी) अधिनियम की धारा 3(3)(बी)(आई) में प्रावधान है कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के उपराज्यपाल नगर प्रशासन में विशेष ज्ञान रखने वाले 10 व्यक्तियों को नामित करेंगे।
पीठ के लिए फैसला लिखते हुए न्यायमूर्ति नरसिम्हा ने अनुच्छेद 239एए (4) का हवाला दिया, जिसके तहत उपराज्यपाल को मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह के अनुसार कार्य करना होता है। उन्होंने कहा कि एमसीडी में नामांकन का कार्य इसके दायरे में न आकर अपवाद खंड के अंतर्गत आता है।
पीठ ने अपने 27 पृष्ठ के फैसले में कहा, “अधिनियम के प्रावधानों पर गौर करने के बाद हम इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि डीएमसी अधिनियम की धारा 3(3)(बी)(आई) एक संसदीय अधिनियम है, जो नगर प्रशासन में विशेष ज्ञान रखने वाले व्यक्तियों के नामांकन की शक्ति उपराज्यपाल को प्रदान करता है। इस शक्ति का प्रयोग उपराज्यपाल का वैधानिक कर्तव्य है न कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार की कार्यकारी शक्ति का।”
पीठ ने कहा कि डीएमसी अधिनियम के तहत उपराज्यपाल को नामांकन की शक्ति का प्रयोग करने का अधिकार है और अनुच्छेद 239एए(4) के तहत अपने विवेक से कार्य करना अपवाद की स्थिति को संतुष्ट करता है।
उच्चतम न्यायालय द्वारा उपराज्यपाल की शक्तियों पर आधिकारिक घोषणा से आम आदमी पार्टी (आप) के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार और एमसीडी को तगड़ा झटका लगा। पार्टी का तर्क था कि उपराज्यपाल को ‘एल्डरमैन’ के नामांकन में निर्वाचित सरकार की सहायता और सलाह के अनुसार काम करना होगा।
भाषा जितेंद्र