मछुआरों के लिए मासिक पेंशन योजना शुरू करने, आवारा पशुओं के लिए गौशालाएं बनाने की विपक्ष की मांग
सुरेश वैभव
- 05 Aug 2024, 06:42 PM
- Updated: 06:42 PM
नयी दिल्ली, पांच अगस्त (भाषा) विपक्ष ने सोमवार को मछुआरों को वित्तीय संरक्षण प्रदान करने के लिए मासिक पेंशन योजना शुरू करने, मत्स्य पालन से संबंधित स्वतंत्र मंत्रालय स्थापित करने और आवारा/निराश्रित पशुओं के लिए गौशालाएं बनाए जाने की मांग सरकार से की।
लोकसभा में विपक्षी दलों के सांसदों ने मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के नियंत्रणाधीन अनुदान की मांगों पर चर्चा में भाग लेते हुए ये मांगें कीं।
कांग्रेस के विजय कुमार उर्फ विजय वसंत ने मछुआरों की दीनहीन स्थिति का उल्लेख करते हुए इन्हें वित्तीय संरक्षण देने के लिए मासिक पेंशन योजना शुरू करने की मांग की।
उन्होंने मत्स्य पालन क्षेत्र की समस्याओं से निपटने के लिए एक स्वतंत्र मंत्रालय बनाने का सरकार के समक्ष प्रस्ताव रखा। उन्होंने यह भी कहा कि तटीय क्षेत्र के सांसदों की एक समन्वय समिति भी बनायी जानी चाहिए, जो मछुआरों और मत्स्य पालन संबंधी विषयों पर नजर बनाकर रख सके।
कांग्रेस के ही कल्याण काले ने सरकार द्वारा राष्ट्रीय गोकुल मिशन में बजटीय प्रावधान नहीं किये जाने का उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि देश में लम्पी रोग से दो लाख गाय-भैंस की जान गयी, लेकिन संबंधित किसानों को सरकार ने कोई मुआवजा नहीं दिया। उन्होंने कहा कि गोवंश आदि के लिए बीमा का प्रावधान किया जाना चाहिए।
इसी पार्टी की ज्योत्स्ना चरणदास महंत ने हाल के महीनों में देश में दुग्ध उत्पादन में हुई कमी के लिए चारे की खराब गुणवत्ता को जिम्मेदार ठहराया।
उन्होंने कहा कि सरकार को किसानों के मवेशियों के लिए किफायती एवं गुणवत्ता युक्त चारा उपलब्ध कराना चाहिए। उन्होंने सभी राज्य सरकारों को यह निर्देश देने का केंद्र से अनुरोध किया कि वे आवारा और निराश्रित पशुओं के लिए गौशालाएं बनवाएं।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के अमराराम ने पशु क्रूरता के आरोप पर एक समुदाय के लोगों के साथ दुर्व्यवहार किये जाने की घटनाओं में बढ़ोतरी का उल्लेख किया।
राष्ट्रीय जनता दल के अभय कुमार सिन्हा ने कहा कि संबंधित मंत्रालय के लिए विभिन्न मदों में बजट में कटौती से बहुत अधिक नुकसान हुआ है।
सिन्हा ने कहा कि छोटे पशुपालक ऋण लेकर या अपने स्तर पर पशु खरीदकर दुग्ध उत्पादन में सहभागी बनते हैं, लेकिन सरकार ने ऐसी कोई योजना नहीं बनाई है कि पशुपालक को किसी तरह का नुकसान पहुंचने की स्थिति में उन्हें मुआवजा अवश्य मिले।
उन्होंने सरकार से मांग की कि वह छोटे पशुपालक को बढ़ावा देने के लिए ठोस योजना बनाये।
समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद श्रीराम प्रसाद चौधरी ने कहा कि देश के मत्स्य पालकों और पशुपालकों के लिए कुल बजट का 0.15 प्रतिशत ही प्रावधान किया गया है, जो बहुत ही कम है।
वाईएसआरसीपी के सांसद एम गुरुमूर्ति ने मछुआरों के हितों के संरक्षण के लिए प्रयास किये जाने की आवश्यकता जताई।
आईयूएमएल के ई टी मोहम्मद बशीर ने समुद्र तटीय इलाकों में अवसंरचना विकास को जरूरी बताया।
इस बीच भारतीय जनता पार्टी के जर्नादन मिश्रा ने आरोप लगाया कि पूर्व की कांग्रेस-नीत सरकारों ने मत्स्य पालन और डेयरी के क्षेत्र में कोई कदम नहीं उठाये, जिसके कारण यह क्षेत्र पिछड़ा है।
उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की नीतियों के कारण देसी गाय समाप्त हो गयी हैं और हम विदेशी नस्ल की गाय पर आश्रित हो गये हैं जो यहां की जलवायु के अनुरूप कतई नहीं होती हैं। लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के राजेश वर्मा ने बिहार के आर्थिक विकास में मत्स्यपालन के योगदान को रेखांकित किया और दूध निकालने वाली स्वचालित मशीनों को लघु किसानों के लिए भी उपलब्ध कराने की आवश्यकता जताई।
सपा के सदस्य लक्ष्मीकांत पप्पू निषाद ने सरकार से मांग की कि किसानों को दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता बिना ब्याज के पशुपालन के लिए दी जानी चाहिए।
आरएसपी के एन के प्रेमचंद्रन ने भी मत्स्य पालन के लिए अलग मंत्रालय बनाने की मांग की। उन्होंने वन अधिकार अधिनियम की तरह मछुआरों के लिए समुद्र अधिकार अधिनियम बनाने की मांग सरकार से की।
भाषा सुरेश