वायनाड भूस्खलन : किस तरह अनियोजित विकास और असामान्य बारिश का दुष्परिणाम है यह आपदा
संतोष दिलीप
- 05 Aug 2024, 06:34 PM
- Updated: 06:34 PM
(साजन थॉमस, सेंट जॉन कॉलेज, अंचल)
तिरुवनंतपुरम, पांच अगस्त (360 इंफो), दक्षिण भारतीय राज्य केरल अब भी अपने इतिहास के सर्वाधिक विनाशक भूस्खलन के सदमे और तबाही से उबर रहा है। एक अनुमान के मुताबिक, इस आपदा में मरने वालों की संख्या 333 है और करीब 281 लोग लापता हैं।
पश्चिमी घाट के पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील इलाके में स्थित वायनाड जिला अपने धुंधयुक्त पर्वतों और हरे-भरे परिदृश्य के लिए पर्यटकों के बीच लोकप्रिय है, लेकिन केरल का यह जिला आज गंभीर आपदा से जूझ रहा है। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के मुताबिक इस आपदा ने एक पूरे इलाके का अस्तित्व मिटा दिया।
मेप्पाडी पंचायत में चूरलमाला-मुंडक्कई क्षेत्र, जो सबसे अधिक प्रभावित हुआ है, पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील क्षेत्र- एक (ईएसजेड1) के अंतर्गत आता है, जिसकी पहचान पारिस्थितिकीविद माधव गाडगिल के नेतृत्व वाले पश्चिमी घाट पारिस्थितिकी विशेषज्ञ पैनल ने वर्ष 2011 में की थी।
गाडगिल रिपोर्ट ने इस क्षेत्र की अनूठी भौगोलिक स्थिति तथा घने वन क्षेत्र के कारण पर्यावरण विरोधी गतिविधियों के प्रति आगाह किया था।
चूरलमाला और मुंडक्कई वायनाड के सुदूर जंगल से सटे इलाकों में शामिल हैं जहां चाय बागानों के मजदूर और किसान रहते हैं, जो छोटे-मोटे व्यवसाय भी करते हैं। चूरलमाला में कुछ घर अब भी बचे हैं, लेकिन भूस्खलन के कारण मुंडक्कई में कोई भी मानव निर्मित संरचना नहीं बची, हालांकि कुछ लोग सौभाग्य वश बच गए।
यह पहली बार नहीं है, जब इस क्षेत्र में आपदा आई है। वर्ष 2019 में आपदा स्थल से कुछ किलोमीटर दूर पुथुमाला में एक बड़े भूस्खलन के कारण 17 लोगों की जान चली गई, संपत्ति को नुकसान पहुंचा और बड़े पैमाने पर भूमि खेती योग्य नहीं रह गई।
इस बार भूमि और संपत्ति के विनाश ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया है। पिछले 30 दिनों में लगभग 1830 मिमी असामान्य वर्षा हुई, जिसके बाद आपदा आई।
जलवायु वैज्ञानिक वायनाड में भूस्खलन की घटना और अरब सागर का तापमान बढ़ने के बीच एक संबंध पाते हैं।
विकास की कीमत चुकाई
बेंगलुरु को कोझिकोड से जोड़ने वाली चार लेन की सुरंग सड़क परियोजना के प्रवेश द्वार कल्लडी के पास स्थित होने के कारण इस क्षेत्र में विकास की आकांक्षाएं बहुत अधिक थीं।
भारत में तीसरी सबसे लंबी सुरंग बनने जा रही है और कोंकण रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा इसका निर्माण किया जा रहा है। लेकिन इसे वन्यजीवों के लिए जोखिम और बाढ़ और भूस्खलन की बढ़ती घटनाओं के लिए पर्यावरण समूहों की आलोचना का सामना करना पड़ा है।
चूरलमाला-मुंडक्कई क्षेत्रों में नए सुरम्य स्थानों की ‘खोज’ और सोचीपारा झरनों जैसे पुराने पसंदीदा स्थानों की बढ़ती लोकप्रियता के बाद पर्यटन फल-फूल रहा था।
स्थानीय किसान बेबी ने बताया कि पिछले कुछ सालों में रिसॉर्ट और होमस्टे की संख्या में भारी वृद्धि हुई है, जिनमें से कई भूस्खलन के लिहाज से संवेदनशील पहाड़ी इलाकों में स्थित हैं।
यह रुझान पिछले दशक में कंक्रीट से बनाए गए कई नए घरों के समान है, जिन्हें मुख्य रूप से खाड़ी देशों से प्राप्त धन से वित्तपोषित किया गया है।
अनियोजित विकास, वनों की कटाई, भूमि उपयोग में परिवर्तन और कम समय के अंदर वैश्विक तापन के कारण होने वाली भारी वर्षा के मिश्रित दुष्प्रभाव को बार-बार होने वाले भूस्खलन का प्रमुख कारण माना जाता है।
अनुसंधान से पता चला है कि इस आपदा का बचे हुए लोगों पर मनोवैज्ञानिक रूप से काफी विपरीत असर पड़ा है।
जलवायु परिवर्तन विस्थापन का एक नया कारण बनकर उभरा है और इस तरह विस्थापित होने वालों को ‘क्लाइमेट रिफ्यूजी’ (जलवायु शरणार्थी)के रूप में संबोधित किया जा रहा है।
वायनाड की आपदा से केरल में उन लोगों की संख्या काफी बढ़ गई है, जो जिन्हें जलवायु परिवर्तन के कारण अपना घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा।
भाषा संतोष