केरल भूस्खलन: मेजर जनरल वी.टी. मैथ्यू बचाव अभियान सफलतापूर्वक पूरा होने के बाद लौटे
खारी दिलीप
- 05 Aug 2024, 05:43 PM
- Updated: 05:43 PM
वायनाड (केरल), पांच अगस्त (भाषा) केरल के भूस्खलन प्रभावित वायनाड में बचाव प्रयासों का समन्वय करने वाले सेना के वरिष्ठ अधिकारी मेजर जनरल वी टी मैथ्यू ने कहा कि यह अभियान 1999 में ओडिशा में आये विनाशकारी चक्रवात के बाद से अब तक का सबसे बड़ा अभियान रहा, जिसका वह हिस्सा रहे हैं।
सोमवार को एक बयान में वायनाड जिले के अधिकारियों ने कहा कि चूरलमाला और मुंदक्कई क्षेत्रों में बचाव अभियान का नेतृत्व करने वाले मेजर जनरल वी टी मैथ्यू 30 जुलाई की आपदा से प्रभावित सैकड़ों लोगों के बचाव का अभियान पूरा करने के बाद बेंगलुरु स्थित केरल-कर्नाटक मुख्यालय लौट आए हैं।
जिलाधिकारी डी आर मेघाश्री ने राज्य की ओर से आभार और सम्मान व्यक्त करते हुए मेजर जनरल को विदाई दी।
बयान के अनुसार, केरल-कर्नाटक के जनरल ऑफिसर कमांडिंग मैथ्यू ने कहा कि चुनौतीपूर्ण मौसम की स्थिति और इलाके के बारे में जानकारी नहीं होने के बावजूद, वह इस बात से बेहद संतुष्ट हैं कि सैन्य बल अधिक लोगों को बचाने में कामयाब रहा और यह सुनिश्चित किया कि व्यापक बचाव अभियान सफल रहे।
जिला प्रशासन द्वारा जारी बयान में मैथ्यू के हवाले से कहा गया, ‘‘शुरुआत में जान जोखिम में डालकर बचाव अभियान को अंजाम दिया गया।’’
इसमें कहा कि उन्होंने यह भी कहा कि 1999 में ओडिशा में आई विनाशकारी चक्रवात आपदा के बाद से यह सबसे बड़ा बचाव अभियान है, जिसका वह हिस्सा रहे। यह दर्शाता है कि वायनाड आपदा कितनी भयावह थी।
बयान के अनुसार, बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और युवाओं सहित जानमाल के नुकसान पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि सभी सैन्यकर्मी मृतकों के परिवारों के प्रति शोक प्रकट करते हैं।
चूरलमाला और मुंदक्कई क्षेत्रों में 30 जुलाई को भूस्खलन के बाद पुलिस, अग्निशमन सेवाओं और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) सहित विभिन्न बलों द्वारा बचाव अभियान तेजी से शुरू किया गया।
बयान में कहा गया कि 30 जुलाई को अपराह्न साढ़े बारह बजे सेना भी इस प्रयास में शामिल हो गई और अभियान के शुरुआती चरणों में कई लोगों को बचाने में सफल रही।
मेजर जनरल मैथ्यू 31 जुलाई को घटना स्थल पहुंचे और बचाव अभियान की कमान संभाली।
पांच सौ से अधिक कर्मियों की टीम में ‘मद्रास इंजीनियरिंग ग्रुप’ के विशेषज्ञ शामिल थे, जो ‘बेली ब्रिज’ बनाने में कुशल है।
पहले ही दिन आपदा स्थल से करीब 300 लोगों को बचाया गया।
केरल के रहने वाले मैथ्यू ने सीमावर्ती इलाकों में कमांडिंग ऑफिसर के तौर पर मोर्चा संभाला।
मैथ्यू को 2021 में राष्ट्रपति के युद्ध सेवा पदक और 2023 में राष्ट्रपति के अति विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने अफ्रीकी देशों सूडान और कांगो में संयुक्त राष्ट्र की शांति सेना के हिस्से के रूप में भी दो साल तक सेवा की है।
भाषा खारी