विपक्ष ने सरकार पर लगाया गृह जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा से बचने का आरोप
मनीषा माधव अविनाश
- 05 Aug 2024, 04:28 PM
- Updated: 04:28 PM
नयी दिल्ली, पांच अगस्त (भाषा) सरकार पर गृह एवं रक्षा जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों के कामकाज पर चर्चा से बचने का आरोप लगाते हुए विपक्ष ने सोमवार को राज्यसभा में दावा किया कि बड़ी-बड़ी घोषणाओं पर काम कुछ भी नहीं हुआ है, वहीं सत्ता पक्ष ने कहा कि इस लक्ष्य को लेकर काम किया जा रहा है कि लोगों को बिजली भी मिले और कार्बन उत्सर्जन भी जीरो हो।
तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओब्रायन ने नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के कामकाज पर राज्यसभा में चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि वैसे तो सभी मंत्रालय महत्वपूर्ण हैं लेकिन इस मंत्रालय का संबंध देश की आने वाली पीढ़ियों से है।
उन्होंने कहा कि वह चार, पांच, छह के प्रभाव का जिक्र करना चाहेंगे। उन्होंने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि चार जून को लोकसभा चुनाव के नतीजे आए और पांच, छह यानी ‘छप्पन’ का आकार घट गया।
डेरेक ने कहा ‘‘इसीलिए गृह मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा के 15 विपक्षी दलों के अनुरोध पर सरकार घबरा गई। हम चाहते थे कि रक्षा मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा हो, इस बात पर चर्चा हो कि हमारी सीमाओं पर क्या हो रहा है और चीन सीमा पर क्या कर रहा है? लेकिन हमारी बात नहीं सुनी गई।’’
डेरेक ने कहा कि सरकार गृह मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा नहीं करना चाहती ‘‘लेकिन हम रचनात्मक विपक्ष होने के नाते इस मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा करना चाहते हैं।’’
उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार राष्ट्रीय स्तर पर सोचे लेकिन स्थानीय स्तर पर सहयोग की भावना से परामर्श करे क्योंकि इससे उसे जमीनी हकीकत का पता चलेगा। उन्होंने कहा कि ‘एक विश्व, एक सूर्य’ और अंतरराष्ट्रीय सौर पैनल जैसी बड़ी-बड़ी घोषणाएं करना सरकार बंद करे क्योंकि इन घोषणाओं पर कुछ भी काम नहीं हुआ है।
उन्होंने छोटे किसानों के लिए ‘पीएम कुसुम’ योजना (प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान योजना) का जिक्र करते हुए कहा कि 2019 में शुरु किए गए इस विकेंद्रीकृत कार्यक्रम में भूमि पर स्थापित 10,000 मेगावाट के विकेंद्रीकृत ग्रिडों को नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्रों से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन तीन फीसदी से भी कम का लक्ष्य हासिल किया गया।
तृणमूल सदस्य ने कहा ‘‘इसी तरह हरित हाइड्रोजन योजना का भी हश्र हुआ है।’’ उन्होंने तंज किया कि आप कोई जिमखाना नहीं बल्कि देश चला रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अगर सरकार गृह मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा नहीं करना चाहती तो कोई बात नहीं, ‘‘हम अगली बार इन मंत्रालयों के कामकाज पर चर्चा करेंगे जब हम सत्ता में होंगे और आप (राजग) विपक्ष में होंगे।’’
चर्चा में भाग लेते हुए भाजपा के लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने कहा कि 2018 में अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन की बैठक के उद्घाटन अवसर पर भारत एक प्रमुख नेता के तौर पर उभरा और ‘एक विश्व, एक सूर्य, एक ग्रिड’ का नारा दिया गया। उन्होंने कहा कि तब 100 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान कर काम शुरु किया गया और हम सौर ऊर्जा के क्षेत्र में 26 गुना की वृद्धि तक पहुंच रहे हैं।
बाजपेयी ने कहा ‘‘सरकार इस लक्ष्य को लेकर काम कर रही है कि बिजली भी मिले और कार्बन उत्सर्जन भी जीरो हो। सरकार के लक्ष्य के अनुसार, 2070 तक ‘नेट जीरो’ कार्बन उत्सर्जन होगा, आठ लाख करोड़ रुपये का निवेश आएगा और छह लाख लोगों को रोजगार मिलेगा।’’
उन्होंने कहा कि हाइड्रोजन, सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा के माध्यम से सरकार देश को ‘नेट जीरो’ उत्सर्जन की राह पर ले जाना चाहती है तथा कोयला, तेल और गैस आधारित ऊर्जा के उत्पादन को कम करना चाहती है।
उन्होंने कहा ‘‘2030 तक 50 लाख टन वार्षिक हरित हाइड्रोजन की क्षमता हासिल करने के लक्ष्य के लिए प्रयास जारी हैं। सरकार सौर ऊर्जा के तथा हाइड्रोजन ऊर्जा के जरिये 125 गीगावाट ऊर्जा तथा इलेक्ट्रोलाइजर के आधार पर 60 से 100 गीगावाट बिजली उत्पादन करना चाहती है। इससे एक लाख करोड़ रुपये की बचत होगी और 50 लाख टन वार्षिक कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी।’’
बाजपेयी ने कहा कि भारत आज नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में विश्व में यूरोप, आस्ट्रेलिया, अमेरिका और कोरिया के समकक्ष है।
कांग्रेस की रंजीत रंजन ने कहा कि जिस तरह से कर की रफ्तार बढ़ रही है, उससे नहीं लगता कि सरकार 2070 तक ‘नेट जीरो’ कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल कर सकेगी।
उन्होंने कहा ‘‘सरकार अपनी रिपोर्ट में कह चुकी है कि आज बिजली का 55 फीसदी हिस्सा कोयले से मिलता है। हरित ऊर्जा की बहुत बात की जाती है। रिकॉर्ड में यह 55 फीसदी है लेकिन वास्तव में यह 15 से मात्र 20 फीसदी ही है। हमारे पास इसका भंडारण ही नहीं है। इसकी और भी समस्याएं हैं जिन्हें उजागर करना चाहिए था।’’
उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार पर्यावरण बचाने की बात करती है वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री के विशेष सुरक्षा समूह ‘एसपीजी’ ने प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए, डीजल से चलने वाले तीन विशेष बख्तरबंद वाहनों के पंजीकरण की अवधि बढ़ाने के लिए एनजीटी के समक्ष आवेदन दाखिल किया जिसे एनजीटी ने खारिज कर दिया।’’
रंजन ने कहा कि जब प्रधानमंत्री इलेक्ट्रिक वाहन में सुरक्षित महसूस नहीं करते तो आम जनता इसका उपयोग कैसे सुरक्षित महसूस कर सकती है।
उन्होंने सवाल किया कि सूर्य पीएम योजना के बुनियादी सौर मॉड्यूल तथा बैटरी के लिए क्या सरकार चीनी आयात पर निर्भर नहीं है? उन्होंने कहा, ‘‘सौर मॉड्यूल तथा बैटरी के निर्माण को मजबूती देने के लिए घरेलू निर्माताओं को प्रोत्साहन देने की जरूरत है जो सरकार नहीं दे रही है और चीन को मजबूत किया जा रहा है।’’
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के एस निरंजन रेड्डी ने चर्चा को आगे बढ़ाते हुए कहा कि आने वाले समय में यह मंत्रालय बहुत महत्वपूर्ण होगा और इस साल इसका बजट पिछले साल के 7,623 करोड़ रुपये से बढ़ा कर 18,852 करोड़ रुपये कर दिया। यह 147.29 फीसदी की वृद्धि मंत्रालय के महत्व को दर्शाती है और इस बजट से कई लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं जिनका समुचित तरीके से दोहन किए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर से शुरुआत कर सौर ऊर्जा के क्षेत्र में स्थानीय लोगों की मदद ली जाए तो न सिर्फ महत्वपूर्ण लक्ष्य हासिल किए जा सकेंगे बल्कि रोजगार सृजन भी होगा।
भाषा
मनीषा माधव